सतना:ज़रूरतमंद की थाली, नहीं रहेगी खाली — मध्य प्रदेश सरकार की इस अति-महत्वाकांक्षी ‘दीनदयाल रसोई योजना’ का उद्देश्य गरीब, मजदूर और असहाय लोगों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक व सम्मानजनक भोजन उपलब्ध कराना था। परंतु विश्वासराव सब्जी मंडी स्थित दीनदयाल रसोई केंद्र में यह योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। धरातल पर योजना का लाभ देने के नाम पर लापरवाही और घोर अव्यवस्था का आलम यह है कि जरूरतमंदों की मजबूरी का सरेआम मजाक उड़ाया जा रहा है।
पकाने में बरती जा रही भारी लापरवाही
रसोई केंद्र में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता इस कदर गिर चुकी है कि उसे पौष्टिक कहना तो दूर, सही ढंग से पका हुआ भी नहीं कहा जा सकता। थाली में परोसी जाने वाली दाल में दाल के दाने कम और पानी ही पानी नजर आता है। दाल को सही तरीके से उबाला तक नहीं जाता, जिससे खड़े दाने तैरते दिखाई देते हैं। सब्जी की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। उसमें किसी तरह का स्वाद ही नहीं होता, बिना देखे खाया जाए तो यह पहचानना भी मुश्किल हो जाता है कि सब्जी आखिर किस चीज की बनी है। वहीं, रोटियों का आटा सही से न गुंथे होने के कारण वे इतनी सख्त होती हैं कि मानो कोई पापड़ खा रहा हो।
गंदगी का अंबार, टूट-फूट का शिकार भवन
इस दीनदयाल रसोई में प्रतिदिन औसतन 250 लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। यहाँ भोजन वितरण का समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक निर्धारित है। इस व्यवस्था को संचालित करने के लिए कुल 10 कर्मचारियों का स्टाफ तैनात है, जिनमें 3 पुरुष और 7 महिलाएं शामिल हैं लेकिन इस कार्यबल के बावजूद रसोई में अव्यवस्था और लापरवाही का माहौल बना हुआ है।
स्वच्छता और बैठने व्यवस्था में अनदेखी
रसोई परिसर की स्वच्छता की बात करें तो ऐसा लगता है कि महीनों से यहाँ झाड़ू और पोछा तक नहीं लगा है। चारों तरफ फैली गंदगी और बदबू के कारण किसी आम इंसान का वहाँ खड़ा होना भी दूभर है। रसोई परिसर में स्वच्छता और सुविधाओं का बुरा हाल है। लाभार्थियों के बैठने के लिए रखी गईं अधिकांश कुर्सियां टूटी पड़ी हैं, वहीं भोजन बनाने के दौरान सुरक्षा-मानकों की सरेआम अनदेखी की जा रही है। साफ-सफाई का कोई ध्यान न रखते हुए कच्ची सामग्री को खुले में छोड़ दिया जाता है और पकाने के बाद भी भोजन को ढका नहीं जाता, जिससे उड़ती धूल-मिट्टी और भिनभिनाती मक्खियों के बीच असुरक्षित माहौल में खाना तैयार हो रहा है।
मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा
इस केंद्र पर आने वाले मजदूरों और गरीबों के पास सीमित संसाधनों के कारण दूसरा कोई विकल्प नहीं है। पेट की आग बुझाने के लिए वे इस गुणवत्ताहीन और असुरक्षित भोजन को खाने पर मजबूर हैं।
ठेकेदार पुष्पेंद्र पांडेय ने बताया कि शहर में जितनी भी दीनदयाल रसोई है उसमें से सबसे अच्छा खाना हमारे यहां मिलता है। भवन में साफ सफाई नगर निगम द्वारा किया जाता है। अगर खाने की गुणवक्ता में कुछ है तो उसमें सुधार कराया जाएगा।
