
नीमच। शहर में आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या अब आमजन की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। सोमवार देर शाम करीब 8 बजे विकास नगर क्षेत्र में दो सांडों के बीच हुई भीषण लड़ाई से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दोनों सांड मुख्य मार्ग पर एक-दूसरे से भिड़ गए, जिससे सडक़ पूरी तरह अवरुद्ध हो गई और लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों सांड काफी देर तक एक-दूसरे पर हमला करते रहे। इस दौरान स्थानीय रहवासी सीए भावेश सिहल उनकी चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। हालांकि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन सडक़ किनारे खड़े चार दोपहिया वाहन और एक कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। वाहनों को भारी नुकसान पहुंचने से वाहन मालिकों में रोष देखा गया।
घटना के दौरान क्षेत्र में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सांडों की लड़ाई इतनी उग्र थी कि लोग काफी देर तक अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। राहगीरों को रास्ता बदलकर निकलना पड़ा, जबकि कई वाहन चालकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा।
नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका समय-समय पर आवारा पशुओं को पकडऩे के लिए अभियान चलाने के दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे अभियान नजर नहीं आते। शहर की प्रमुख सडक़ों, कॉलोनियों और बाजारों में बड़ी संख्या में आवारा मवेशी घूमते रहते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
रहवासियों का आरोप है कि यदि समय रहते आवारा पशुओं को पकडऩे की प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो इस तरह की घटना नहीं होती। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से शहर में विशेष अभियान चलाकर आवारा सांडों एवं अन्य पशुओं को तत्काल पकडऩे तथा सुरक्षित गौशालाओं में भेजने की मांग की है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
शहरवासियों का कहना है कि आवारा सांडों के कारण पहले भी कई लोग घायल हो चुके हैं और कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है। हर घटना के बाद कुछ दिनों तक कार्रवाई का दावा किया जाता है, लेकिन स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पालिका से मांग की है कि शहर में आवारा पशुओं के खिलाफ नियमित और प्रभावी अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
फिलहाल इस घटना में जनहानि नहीं हुई, लेकिन जिस तरह से सांडों की लड़ाई ने वाहनों को नुकसान पहुंचाया और लोगों की जान जोखिम में डाली, उसने नगर पालिका की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
