
जबलपुर। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में 13 वें दिन सुनवाई हुई। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायाधीश विनय सराफ की विशेष युगलपीठ के समक्ष ओबीसी पक्ष ने सरकार की ओर से आरक्षण लागू करने के आधार और ओबीसी की पहचान तय करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाये। वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक रत्नू और पी विल्सन की बहस पूरी होने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने पक्ष रखा। उनकी बहस पूरी नहीं हो सकी। अब मंगलवार को दोपहर 2.30 बजे फिर सुनवाई होगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री ठाकुर ने दलील दी कि जुलाई 2019 से पहले प्रदेश में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत था। दो जुलाई 2019 को 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण लागू किया गया और 14 अगस्त 2019 को ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया। उनका कहना था कि 50 प्रतिशत की सीमा टूटने के लिए ओबीसी आरक्षण को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
