
मंदसौर। शहर के सुनियोजित एवं संतुलित विकास के लिए तैयार किया जाने वाला मंदसौर का मास्टर प्लान पिछले कई वर्षों से चर्चाओं, बैठकों और प्रक्रियाओं के बीच ऐसा उलझा हुआ है कि अब यह शहरवासियों के लिए किसी भूल-भुलैया से कम नजर नहीं आता। वर्ष 2010 के बाद से नवीन मास्टर प्लान को लेकर कई स्तरों पर कवायद हुई। समय के साथ अधिकारी बदले, कलेक्टर बदले, जनप्रतिनिधियों के स्तर पर चर्चाएं हुईं, लेकिन मास्टर प्लान को अंतिम रूप देकर लागू करने का इंतजार खत्म नहीं हुआ। इस लंबी देरी का असर अब शहर के नियोजित विकास पर साफ दिखाई देने लगा है।
समाजसेवी एवं पार्षद सुनील बंसल ने मास्टर प्लान को लेकर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंदसौर की जनता आखिर कब तक नए मास्टर प्लान के लागू होने का इंतजार करेगी। उन्होंने कहा कि शहर लगातार विस्तार कर रहा है। आबादी बढ़ रही है, नए आवासीय क्षेत्र विकसित हो रहे हैं और व्यापारिक गतिविधियों का भी विस्तार हो रहा है। ऐसे में शहर के भविष्य की दिशा तय करने वाला मास्टर प्लान वर्षों तक लंबित रहना गंभीर विषय है।
व्यवसायी और आम नागरिक असमंजस में
श्री बंसल ने कहा कि मास्टर प्लान केवल सरकारी कागजों में दर्ज एक योजना नहीं है, बल्कि इसके आधार पर शहर की सड़कें, आवासीय क्षेत्र, व्यावसायिक क्षेत्र, सार्वजनिक सुविधाएं और भविष्य का विस्तार निर्धारित होता है। मास्टर प्लान स्पष्ट नहीं होने से अनेक नागरिक और व्यवसायी अपने भविष्य से जुड़े निर्णयों को लेकर असमंजस में हैं। शहर का विस्तार किस दिशा में होना है और आने वाले वर्षों में विकास की प्राथमिकताएं क्या रहेंगी, यह स्पष्ट होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान को लेकर समय-समय पर बैठकों और चर्चाओं का दौर चलता रहा है। जनता के सामने अलग-अलग बातें सामने आती हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, इसे लेकर स्पष्टता का अभाव है। उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण योजना किसी एक अधिकारी के स्तर पर तैयार या प्रभावित नहीं हो सकती। इसमें प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों की सामूहिक भूमिका होती है।
धरने, प्रदर्शन और ज्ञापनों के बाद भी इंतजार
बंसल ने कहा कि मास्टर प्लान को लेकर शहर के विभिन्न समाजों, नागरिकों और संगठनों ने समय-समय पर धरना, प्रदर्शन एवं ज्ञापन के माध्यम से अपनी मांग रखी है। इसके बावजूद समाधान सामने नहीं आना चिंता का विषय है। मंदसौर भगवान पशुपतिनाथ की नगरी है और शहर का विकास उसकी बढ़ती जरूरतों तथा भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
अब निर्णय का समय, सिर्फ बैठक का नहीं
उन्होंने कहा कि अब आवश्यकता नई बैठकों और आश्वासनों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ ठोस निर्णय लेने की है। मास्टर प्लान की प्रक्रिया पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त तरीके से पूरी कर उसे शीघ्र अंतिम रूप दिया जाए। सभी जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और इससे जुड़े सभी पक्ष शहरहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एकजुट हों।
श्री बंसल ने कहा कि वर्षों से अटके मास्टर प्लान को अब और लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। मंदसौर के सुनियोजित विकास के लिए स्पष्ट नीति, पारदर्शी प्रक्रिया और समयबद्ध क्रियान्वयन ही शहर के भविष्य को सही दिशा दे सकता है।
