
सारनी। क्षेत्र में प्रख्यात सतपुड़ा बांध का जलस्तर ठहरा रहा। रहवासियों व किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। दो दिनों से बारिश का इंतजार, 24 घंटे में महज 4 मिमी वर्षा—फसलों पर मंडराने लगी संकट की आशंका
वर्तमान में पावन सावन माह में जहां झमाझम बारिश से खेत-खलिहान और जलस्रोत लबालब होने की उम्मीद रहती है, वहीं इस बार मौसम की बेरुखी ने शहरवासियों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो दिनों से क्षेत्र में बारिश कम होने से एक ओर जहां उमस और गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर खरीफ फसलों को लेकर किसान चिंतित नजर आने लगे हैं।सतपुड़ा बांध के 2 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजे के जलाशय आंकड़ों के अनुसार बांध का जलस्तर 1430.50 फीट दर्ज किया गया। बीते 24 घंटे में केवल 4 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि अब तक की संचयी वर्षा 379 मिलीमीटर दर्ज की गई है। बांध के किसी भी गेट को खोलने की आवश्यकता नहीं पड़ी और अधिकतम गेट गतिविधि शून्य रही।
बारिश की रफ्तार थमने का असर खेतों पर भी दिखाई देने लगा है। सावन के महत्वपूर्ण दौर में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों को खरीफ फसलों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। विशेषकर वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं।शहरवासियों का कहना है कि सावन में लगातार बारिश व सावन की झड़ी होने से जलस्रोतों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है और खेती-किसानी को भी मजबूती मिलती है, लेकिन लगातार अच्छी बारिश का इंतजार अब चिंता का कारण बनता जा रहा है। किसानों को उम्मीद है कि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय होगा और क्षेत्र में अच्छी बारिश होगी, जिससे फसलों को आवश्यक नमी मिल सकेगी।
फिलहाल सतपुड़ा बांध का जलस्तर स्थिर है और गेट बंद हैं, लेकिन बारिश की कमी ने सावन के मौसम में ही जल प्रबंधन और खेती को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। अब शहरवासियों और किसानों की निगाहें आसमान में छाए बादलों पर टिकी हैं इंतजार है ऐसी बारिश का, जो खेतों में हरियाली और लोगों के चेहरों पर फिर से संतोष लौटाए।
