महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
अपने बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले प्रदेश के पूर्व मंत्री व जबलपुर के पाटन से विधायक अजय विश्रोई ने अपनी ही पार्टी के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह पर निशाना साधा तो चर्चाओं का बाजार सरगर्म हो गया। सोशल मीडिया में पोस्ट करते हुए विधायक ने लिखा है कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह द्वारा जबलपुर- पाटन सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण को शासन से स्वीकृति नहीं दिलवाई गई है क्योंकि ये उनकी प्राथमिकता में नहीं है। चर्चा है कि लोक निर्माण मंत्री से कोई संतुष्टीपूर्ण जवाब नहीं मिला तो विधायक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दरवाजा खटखटाया और उनसे मुलाकात कर एक पत्र सौंपा जिसमें मांग की गई कि जबलपुर-पाटन एवं पाटन-मनकेड़ी सड़क के निर्माण कार्य, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य जल्द कराया जाए।
विधायक के अनुसार जबलपुर-पाटन सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की योजना को प्रदेश सरकार के बजट में शामिल किया जा चुका है, फिर भी यह सड़क लोक निर्माण मंत्री की प्राथमिकता में नहीं है, ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है। बतकही है कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की कार्यशैली की शिकायत विधायक ने सीएम से की है। हालांकि अभी तक लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह द्वारा इस पूरे मामले में कोई बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी तरफ नगर कांग्रेस के खेमे में लोक निर्माण मंत्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हुईं जिसने राजनैतिक गलियारों में मंत्री को अभी भी सुर्खियों में बनाए रखा है।
सोशल मीडिया में अजय विश्रोई और राकेश सिंह के आपसी टकराव की तस्वीरें वायरल हुईं तो सवाल खड़े जरूर हुए कि अपनी पार्टी के ही विधायक की मांग पर मंत्री द्वारा एक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा था, आखिर वजह क्या थी, क्या आपसी मनमुटाव या फिर कुछ और.. बहरहाल कारण कुछ भी हो लेकिन जिस तरह से लोक निर्माण मंत्री के खिलाफ विधायक ने आवाज उठाई उससे तो ध्वनित हो ही गया कि भाजपा में अंदरूनी समन्वय किस दशा में है। ऎसा पहली बार नहीं हुआ है, समय समय पर पार्टी की अंतर्कलह सामने आती रही है। यह बात अलहदा है कि भाजपा के कर्णधार इस तरह के विषयों को बड़े परिवार की छुटपुट खटपट बताते रहे हैं।
विधायक के तेवर और प्राधिकरण
पिछले दिनों जबलपुर के शताब्दीपुरम एमआर-4 रोड के पास वर्षों से जमीं अवैध झुग्गी झोपड़ियाँ और दुकानों के कब्जे, अवैध कब्जों को हटाने से जुड़ी सुर्खियां बटोर गई। दरअसल हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, जबलपुर विकास प्राधिकरण ने संयुक्त रूप से कार्यवाई करते हुए अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई शुरू की थी। मामले में उत्तर मध्य विधायक चाहते तो जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन से सामान्य चर्चा कर बारिश में हो रही अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को रोक सकते थे लेकिन श्रेय लेने के चक्कर में महोदय ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी के सदस्य पर अपरोक्ष निशाना साधा और जबलपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को जमकर फटकार लगाते हुए कह दिया कि नौटंकी चल रही है क्या ये जेडीए की….विधायक के तेवर के मद्देनजर अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई रुक गई।
इस वाक्ये के बाद सोशल मीडिया में चर्चाएं सरगर्म हुईं कि गरीबों से दिली लगाव के चलते विधायक अभिलाष पांडे के हस्तक्षेप के बाद ही गरीबों को राहत मिली है लेकिन कुछ समय बाद हकीकत कुछ और ही निकली। खबर सामने आई कि हाईकोर्ट से अगली सुनवाई तक अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।इसके बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का स्वरूप बदल गया, कमेंट सामने आने लगे कि विधायक महोदय कम से कम यहां तो श्रेय लेने की राजनीति न करें। यद्यपि विधायक समर्थक पोस्टर बाजी कर अपने बॉस को गरीबों का मसीहा बताने की कोशिश में लगे रहे। उधर भगवादल के ही कुछ कार्यकर्ता विधायक अभिलाष पांडे के उपरोक्त किरदार को राजनैतिक स्टंट निरूपित करते सुने गये।
सियासी चश्मेधारियों को लगा कि इस विषय को लेकर जेडीए अध्यक्ष और विधायक आमने सामने होंगे, एक तरफ विधायक का सख्त रूख और दूसरी तरफ जेडीए अध्यक्ष की सादगी भरा जवाब कि जो भी कार्रवाई हो रही है वह हाईकोर्ट के निर्देश पर हो रही है, से सभी के मंसूबे धरे के धरे रह गये। फिलहाल कार्रवाई पर विराम लग चुका है, परन्तु इस बात से साफ हो गया है की भाजपा की अंदरूनी राजनीतिक किस करवट जा रही है। चर्चाएं तो ये भी हुईं कि विधायक अभिलाष पांडे चाहते थे कि जेडीए अध्यक्ष की कमान उनके चहेते को दी जाए लेकिन संगठन द्वारा ये कुर्सी दूसरे को दे दी गई जिसके बाद विधायक को जेडीए के प्रति भड़ास निकालने का मौका मिला और फिर जो हुआ वो सभी के सामने ही गया।
