भारत को तीन साल में सबसे बड़ा रेशम उत्पादक बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध: गिरिराज सिंह

बेंगलुरु 20 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि केंद्र सरकार देश के रेशम उत्पादन क्षेत्र के विस्तार और रेशम किसानों की आर्थिक प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री सिंह ने तीन साल में भारत को विश्व का सबसे बड़ा रेशम उत्पादक बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि देश का रेशम उत्पादन जो 2014 में 26,000 टन था आज बढ़कर 42,000 टन हो गया है। श्री सिंह ने रविवार को यहां केंद्रीय रेशम बोर्ड के 77वें स्थापना दिवस कार्यक्रम और रेशम उत्पादों एवं प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे भी शामिल थीं ।

इस अवसर पर सांसद और सीएसबी बोर्ड के सदस्य जी. लक्ष्मीनारायण, वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव (रेशम) और सीएसबी की उपाध्यक्ष पद्मिनी सिंगला, बोर्ड के सदस्य सचिव पी. शिवकुमार, कर्नाटक सरकार के बागवानी और रेशम उत्पादन विभाग के सचिव गिरीश आर. और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इसमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु राज्यों के रेशम उत्पादक और बुनकर भी शामिल हुए।

समारोह को संबोधित करते हुए कपड़ा मंत्री श्री सिंह ने कहा कि 2030-31 तक इसे 60,000 टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है और 2028-29 तक भारत को रेशम उत्पादन में विश्व स्तर पर पहले स्थान पर लाने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में शहतूत की खेती बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के चक्रों को बढ़ाकर किसानों की वार्षिक आय को 10 लाख से 12 लाख रुपये तक बढ़ाने की आकांक्षा है। गौरतलब है कि रेशम के कीड़े शहतूत की पत्तियों पर पलते हैं।

कपड़ा मंत्री ने रेशम उत्पादक किसानों में प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा देने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान’ पुरस्कार प्रतियोगिताओं के आयोजन का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिकों के नए आविष्कार, संकर किस्में और आधुनिक मशीनरी सीधे किसानों तक पहुंचनी चाहिए। मंत्री ने बताया कि ऐसे समय में जब चीन का रेशम उत्पादन घट रहा है, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय रेशम की मांग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि रेशम उत्पादन से लेकर कताई और बुनाई तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, देश के वस्त्र बाजार को 300 बिलियन डॉलर तक ले जाना और बुनकरों और श्रमिक वर्ग के लिए न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताएं हैं।

उच्च उपज देने वाले रेशमकीटों की संकर प्रजातियों और मशीनों को शामिल किया जा रहा है, साथ ही गुणवत्ता की जांच और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एआई, जीआईएस और मशीन लर्निंग तकनीकों को एकीकृत किया जा रहा है।

सुश्री करंदलाजे ने कहा कि कर्नाटक देश के कुल रेशम उत्पादन में अग्रणी स्थान रखता है और सरकार इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। आधुनिक तकनीकों और उच्च उत्पादन विधियों को अपनाकर वैश्विक निर्यात मानकों के रेशम उत्पादन को महत्व दिया जा रहा है जिससे घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता काफी कम होगी। बड़ी संख्या में उद्यमी एमएसएमई ढांचे के तहत पंजीकरण करा रहे हैं और सरकार उन्हें सहयोग देने के लिए लगातार अनुदान और गुणवत्ता सुधार योजनाएं लागू कर रही है। मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादकों को उपयुक्त बाजार पहुंच प्रदान करना और रेशम उत्पादन और वस्त्र उद्योग क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

कपड़ा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (रेशम) सुश्री सिंगला ने रेशम उत्पादन क्षेत्र की रणनीतिक प्रगति के बारे में बताते हुए कहा कि रेशम का उत्पादन बढ़ाने के लिए उच्च उपज देने वाले रेशम कीटों की संकर प्रजातियों और मशीनों को शामिल किया जा रहा है, साथ ही गुणवत्ता की जांच और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एआई, जीआईएस और मशीन लर्निंग तकनीकों को एकीकृत किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान, सिल्क बोर्ड द्वारा विभिन्न संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया, 28 वैज्ञानिकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए, उत्कृष्ट कर्मचारियों और हितधारकों को पुरस्कार प्रदान किए गए और बोर्ड के विभिन्न प्रकाशनों और पत्रिकाओं का विमोचन भी किया गया।

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