भोपाल। “क्या भोपाल में आपके घर तक पहुंच रहा पानी पीने लायक है… या बीमारी का कारण बन रहा है? एक रिपोर्ट ने नगर निगम की पानी सप्लाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा है कि बड़े तालाब से सप्लाई होने वाले 90 फीसदी पानी के सैंपल जांच में फेल हो गए हैं।”
भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में सप्लाई हो रहे पेयजल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठनों का दावा है कि नगर निगम कई इलाकों में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो भोपाल में भी इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति बन सकती है।
संगठनों ने अपनी जांच रिपोर्ट जारी करते हुए दावा किया कि 30 बस्तियों से लिए गए 63 पानी के नमूनों में से 43 सैंपलों में फीकल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला है। यानी करीब 68 फीसदी नमूने दूषित पाए गए।
सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि बड़े तालाब से सप्लाई होने वाले पानी के 90 फीसदी नमूने और कोलार डैम से सप्लाई होने वाले 25 फीसदी नमूने भी जांच में फेल हो गए।
संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में लोग लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इससे दस्त, उल्टी, टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है… अगर पानी ही सुरक्षित नहीं है, तो भोपाल के लोग किस पर भरोसा करें?
फिलहाल, नगर निगम की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
