जबलपुर: शहर के रामपुर चौक स्थित डेलीमा कम्पाउंड में स्थित प्राचीन भगवान शिव मंदिर के ऐतिहासिक महत्व की जांच करवाये जाने की मांग करते हुए जिला न्यायालय में सिविल वाद दायर किया गया था। न्यायालय ने जिला कलेक्टर को निर्देषित किया है कि मंदिर के ऐतिहासिक महत्व की जांच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अथवा अन्य सक्षम शासकीय विभाग कराकर विस्तृत प्रतिवेदन पेश करे।
न्यायालय में दायर सिविल विवाद में कहा गया था कि उक्त मंदिर को उषा डेलीमा अपनी निजी सम्पति बताती है। उनको कहना है कि उक्त मंदिर का निर्माण साल 1942 में उसके परिवार के सदस्यो के द्वारा करवाया गया था। इसके विपरित प्रतिवादियो की तरफ से दलील की गयी कि उक्त षिव मंदिर दो सौ साल पुराना है। उपलब्ध राजस्व अभिलेखों एवं अन्य दस्तावेजों के आलोक में विशेषज्ञ संस्था द्वारा परीक्षण किया जाना न्यायहित में आवश्यक है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि विवादित स्थल की वास्तविक स्थिति, प्राचीनता, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं पुरातात्विक महत्व का निर्धारण विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा कराया जाना आवश्यक है। जिला कलेक्टर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्था अथवा अन्य सक्षम शासकीय विभाग के माध्यम से स्थल का सर्वेक्षण कराकर विस्तृत प्रतिवेदन न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। पुनरीक्षणकर्ता की तरफ से अधिवक्ता शांतनु आयाची एवं आदर्श हीरा ने पैरवी की।
