सिंगरौली :जिला मुख्यालय बैढ़न के अंबेडकर चौक स्थित करोड़ों रुपये की लागत से बने व्यावसायिक प्लाजा की बदहाली अब सरकारी लापरवाही की मिसाल बनती जा रही है।जिस भवन को शहर के व्यापारिक विकास और व्यवस्थित बाजार के लिए तैयार किया गया था, वह आज कथित तौर पर शराबियों, चिलमबाजों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है। सबसे हैरानी की बात यह है कि कोतवाली बैढ़न से महज 300 मीटर की दूरी पर स्थित इस प्लाजा में कबाड़ चोर सैकड़ों दुकानों के शटर काटकर ले गए, लेकिन जिम्मेदार तंत्र समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सका।
करीब तीन वर्ष पहले भवन को जर्जर घोषित कर व्यापारियों से दुकानें खाली करा ली गई थीं। तब उन्हें शीघ्र वैकल्पिक व्यवस्था और नए निर्माण का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज तक न नया प्लाजा बना और न ही व्यापारियों को कारोबार के लिए स्थायी व्यवस्था मिल सकी। परिणामस्वरूप सैकड़ों व्यापारी रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लाजा की देखरेख पूरी तरह ठप है। भवन के भीतर रात के समय शराबखोरी और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
कबाड़ी चोर काट ले गये दुकानों के शटर
कबाड़ चोर भवन के लोहे के शटर और अन्य सामान काटकर ले गए, जिससे सरकारी संपत्ति को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। संयुक्त व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजाराम केसरी के नेतृत्व में व्यापारी कई बार कलेक्टर, प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायक से मिलकर नए व्यावसायिक परिसर के निर्माण तथा व्यापारियों के पुनर्वास की मांग कर चुके हैं। हाल ही में प्रभारी मंत्री के दौरे के दौरान भी प्रतिनिधिमंडल ने यह मुद्दा उठाया, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। इधर विधायक रामनिवास शाह ने भी प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए प्लाजा की स्थिति पर सवाल उठाए थे। हालांकि व्यावसायिक प्लाजा और सिविल सेंटर से जुड़ा मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। महापौर रानी अग्रवाल द्वारा दायर याचिका के कारण अंतिम निर्णय लंबित है।
कार्रवाई हुई तो कई नपेंगे ननि के अधिकारी
पिछले दिनों जिले के दो दिवसीय दौरे पर प्रभारी मंत्री सम्पतिया उईके के समक्ष सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह ने जोर-शोर से मुद्दा उठाया। कहा की करीब तीन साल से व्यापारी दर-दर भटक रहे हैं, उनकी पीड़ा कोई नही समझ रहा है। यहां के एक सैकड़ा से अधिक व्यापारी बेघर हैं। व्यावसायिक प्लाजा निर्माण कराने की बात की गई थी, लेकिन ऐसा नही हुआ। विधायक ने कहा कि डीएमएफ फंड से नई दुकानों का निर्माण हो सकता है। इसपर कलेक्टर गौरव बैनल ने कहा कि डीएमएफ फंड देंगे जरूर, लेकिन व्यावसायिक प्लाजा गनियारी 10-12 साल में जर्जर क्यों हुआ, इसका जांच हो और दोषी ननि अधिकारियों पर कार्रवाई हो। तभी डीएमएफ की राशि मिल सकती है। चर्चा है कि यदि व्यावसायिक प्लाजा भवन के मामले में कार्रवाई हुई तो ननि के कई पूर्व अधिकारी नप सकते हैं।
