जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक व जस्टिस विनय सराफ की विशेष युगलपीठ के समक्ष गुरुवार को मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर मैराथन बहस हुई। ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक प्रसाद शाह ने जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण के पक्ष में दलीलें रखीं। दोपहर 2.30 बजे से सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केएम नटराज ने पक्ष रखा, जो शाम 4.35 बजे तक चला। सरकार आज शुक्रवार को सुबह 11.30 बजे फिर बहस करेगी।
ओबीसी पक्ष ने हाईकोर्ट की वर्ष 2022-23 की चयन परीक्षा के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य वर्ग की कटआफ 75, जबकि ओबीसी की 88 अंक रही। अधिक अंक के बावजूद ओबीसी अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा उठाया गया। तत्कालीन न्यायामूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति सुजय पाल के निर्णयों का भी हवाला दिया गया। वहीं सरकार ने ओबीसी की आबादी करीब 51 प्रतिशत बताते हुए 2011 के आंकड़ों का हवाला दिया और महाजन आयोग की रिपोर्ट को आधार बताया। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल किया कि 1983 की रिपोर्ट काफी पुरानी है। 2019 से पहले आरक्षण बढ़ाने के लिए सरकार ने क्या फील्ड वर्क किया। हाईकोर्ट ने कहा कि 2019 के बाद की रिपोर्टो को आधार नहीं बनाया जा सकता। सुनवाई में ओबीसी के क्लास-वन, टू और थ्री सेवाओं में प्रतिनिधित्व के सरकारी आंकड़ों पर भी चर्चा हुई।
