सीजेपी की रणनीति बनी छात्र इकाईयों के लिए सबक

दिल्ली डायरी

प्रवेश कुमार मिश्र

नीट पेपर लीक घोटाले को लेकर काकरोच जनता पार्टी के भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद बैकफुट पर आई केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिए जाने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जल्दबाजी में छात्रों के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश जारी किए जाने के बाद इस आंदोलन को जिस तरह सफलतम आंदोलन की श्रेणी में रखकर चर्चा हो रही है, उसके बाद भाजपा व कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के छात्र इकाईयों के रणनीतिकारों के होश उड़ गए हैं. चर्चा है कि बड़े व स्थापित दलों के शीर्ष नेतृत्व ने अपने छात्र इकाई के वरिष्ठ नेताओं को सीजेपी की रणनीति को बारीकी से अध्ययन करने को कहा गया है. क्योंकि जिस तरह से सोशल मीडिया के माध्यम से बगैर सांगठनिक ढांचे को पूरे देश के छात्रों को जोड़ा गया और उन्हें एकजुट कर आंदोलन को धार दी गई ,यह रणनीति विमर्श का विषय है. इतना ही नहीं बदलते दौर में जिस परिपक्वता के साथ सीजेपी के प्रवक्ताओं ने केन्द्रीय मंत्रियों से बातचीत कर उन्हें अपनी शर्तों पर झूकने को मजबूर किया उसकी चौतरफा सराहना हो रही है. कहा जा रहा है कि एबीवीपी व एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्षों ने अपनी ईकाईयों को नए सिरे से तैयार करने की रणनीति बनाई है.

 

बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा ने झोंकी ताकत

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा खाली की गई बांकीपुर विधानसभा सीट इस समय सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी है. एक विधानसभा उपचुनाव में जिस तरह से भाजपाई रणनीतिकार अपनी ताकत झोंक कर घर-घर जाकर भाजपाई उम्मीदवार के लिए वोट मांग रहे हैं उससे साफ है कि जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा एक उम्मीदवार के रूप में दी गई चुनौती भाजपाई रणनीतिकारों के लिए भारी पड़ रही है. संसद के मानसून सत्र में मौजूद बिहार के भाजपाई सांसद जिस घबराहट व बेचैनी के साथ बांकीपुर उपचुनाव की चर्चा करते हुए आम मतदाताओं के रूख के बारे में बता रहे हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा का गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र में भी लड़ाई एकतरफा नहीं है. बताया जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा ज्यादातर सांसदों, लगभग सभी विधायकों, जिलाध्यक्षों, पूर्व सांसदों व विधायकों को गली गली में घुमकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जाना सब कुछ समझने के लिए काफी है. चर्चा यह भी है कि कांग्रेसी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बढ़ते कदम पर नजर रखे हुए है.

 

शरद पवार के रूख पर है कांग्रेस की नजर

 

एनसीपी शरद गुट व अजीत पवार गुट की एकजुटता की सुगबुगाहट के बीच शरद पवार व सुप्रिया सुले की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है. बदलते राजनीतिक परिदृश्य में मेल-मिलाप के इस दौर को इंडिया गठबंधन के लिए बेहतर खबर नहीं मानी जा रही है. चर्चा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनसीपी को शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के माध्यम से इंडिया गठबंधन में बने रहने के लिए प्रयास किया जा रहा है. इतना ही नहीं शिवसेना उद्धव ठाकरे द्वारा भी महाराष्ट्र की रणनीति को लेकर एकजुटता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है.

 

विपक्षी एकता के साथ रखने का प्रयास

 

संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार द्वारा विभिन्न संविधान संशोधन विधेयक और विधेयकों को पारित कराने के लिए सदन के अंदर जिस तरह से अंकगणित ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है उसके बीच विपक्षी एकजुटता को बनाए रखने की कोशिश भी की जा रही है. इंडिया गठबंधन अपने मौजूदा व पूर्व सहयोगियों को एकजुट करने का प्रयास आरंभ करते हुए डीएमके व आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बहुस्तरीय विमर्श करते हुए सदन के अंदर एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रही है.

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