गुरु पूर्णिमा पर जामसांवली धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, ढाई लाख श्रद्धालुओं ने चमत्कारिक हनुमान जी के चरणों में नवाया शीश

सौसर, गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर क्षेत्र के प्रसिद्ध चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, हनुमान लोक जामसावली धाम में आस्था अपने चरम पर दिखाई दी। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लगभग ढाई लाख श्रद्धालुओं ने हनुमान दादा के दिव्य दरबार में पहुंचकर गुरु रूप में उनका पूजन-अर्चन किया तथा सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के बावजूद जिला प्रशासन, पुलिस एवं मंदिर ट्रस्ट की सुदृढ़ व्यवस्थाओं के चलते पूरा आयोजन शांतिपूर्ण, व्यवस्थित एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर “जय श्रीराम” और “जय हनुमान” के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान रहा।

 

सनातन परंपरा में भगवान श्रीहनुमान को अखंड भक्ति, सेवा, समर्पण, ज्ञान और गुरु-तत्व का जीवंत स्वरूप माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा के दिन हनुमान जी को अपना गुरु मानकर श्रद्धा और विश्वास के साथ उनके श्रीचरणों में नतमस्तक होते हैं, उनके जीवन के कष्ट दूर होते हैं, संकटों का निवारण होता है और उन्हें बल, बुद्धि, विद्या तथा आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी अटूट विश्वास के कारण गुरु पूर्णिमा पर जामसावली धाम में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।

 

*भजन संध्या में भक्ति की सरिता बही*

 

गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर आयोजित भव्य भजन संध्या में प्रसिद्ध भजन गायक पुनीत कुशवाह ने अपनी मधुर एवं ओजस्वी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक चले भजनों के बीच पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस में डूबा रहा और श्रद्धालु भक्ति भाव से झूमते नजर आए।

 

*वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ महाभिषेक*

 

गुरु पूर्णिमा की प्रातःकाल मुख्य यजमान कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ, पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद्र परिहार तथा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीहनुमान जी का विधि-विधान से अभिषेक एवं पूजन-अर्चन किया। पूजा-अर्चना के पश्चात मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए और देखते ही देखते दर्शनार्थियों की लंबी कतारें मंदिर परिसर से बाहर तक पहुंच गईं।

 

*श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रही व्यापक व्यवस्थाए*

 

मंदिर संस्थान ने लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। श्रद्धालुओं के ठहरने हेतु विशाल वाटरप्रूफ पंडाल, चौबीसों घंटे निःशुल्क भंडारा, पेयजल एवं चिकित्सा सुविधा के साथ सौसर रेलवे स्टेशन से जामसावली धाम तक निःशुल्क बस सेवा उपलब्ध कराई गई। वहीं जिला प्रशासन एवं पुलिस बल ने सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और भीड़ नियंत्रण की सुदृढ़ व्यवस्था कर आयोजन को सफल बनाया। स्वयंसेवक भी पूरे समय श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे।

 

*आस्था, अनुशासन और सेवा का अद्भुत संगम*

 

गुरु पूर्णिमा पर जामसांवली धाम में उमड़ा श्रद्धा का यह महासागर एक बार फिर यह संदेश दे गया कि चमत्कारिक हनुमान जी महाराज के प्रति भक्तों की अटूट आस्था समय के साथ और अधिक प्रगाढ़ होती जा रही है। 2.5 लाख श्रद्धालुओं की उपस्थिति, अनुशासित दर्शन व्यवस्था, सेवा भाव से जुटे स्वयंसेवकों और प्रशासन की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं ने इस महोत्सव को न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि व्यवस्थापन की दृष्टि से भी ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बना दिया।

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