मुर्मु ने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने पर अनेक नागरिक-केंद्रित पहलों का शुभारंभ किया

नयी दिल्ली 28 जुलाई (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रपति भवन तथा राष्ट्रपति संपदाओं में अनेक पहलों का उद्घाटन किया और विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

राष्ट्रपति सचिवालय ने मंगलवार को बताया कि इन पहलों में राष्ट्रपति भवन के आगंतुकों के लिए हिंदी, अंग्रेज़ी तथा 14 अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध, सांकेतिक भाषा मॉड्यूल से युक्त एप-आधारित ई-ऑडियो गाइड का शुभारंभ, 300 चयनित राष्ट्रपति उपहारों की सार्वजनिक नीलामी के लिए ई-उपहार के तीसरे संस्करण का शुभारंभ, जिसकी नीलामी आगामी 5 अगस्त से 5 सितंबर तक होगी, राष्ट्रपति संपदा के बच्चों के लिए ‘बचपन बाल परिसर’ का उद्घाटन तथा कर्मचारियों और राष्ट्रपति संपदा के निवासियों के लिए महिलाओं द्वारा संचालित चालकों और परिचालकों के साथ किराया-मुक्त विद्युत बस सेवा ‘राही’ का शुभारंभ शामिल है।

राष्ट्रपति ने नेट ज़ीरो एनर्जी रणनीति के अंतर्गत सेवा ब्लॉक के निर्माण की आधारशिला भी रखी तथा राष्ट्रपति निकेतन, देहरादून और राष्ट्रपति निलयम, सिकंदराबाद में आवास सुविधाओं का उद्घाटन किया। इसके अलावा राष्ट्रपति संपदा में स्टाफ क्वार्टरों के पुनर्विकास की आधारशिला भी रखी।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह निरंतर प्रयास रहा है कि राष्ट्रपति भवन भारत की समृद्ध परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय आदर्शों का एक सजीव प्रतीक बना रहे। उन्होंने पिछले एक वर्ष के दौरान भारत की सभ्यतागत विरासत को बढ़ावा देने के लिए उठाये गये कदमों का भी उल्लेख किया।

बाद में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति मुर्मु के कार्यकाल पर आधारित पांच प्रकाशनों का लोकार्पण किया और उनकी प्रथम प्रतियां राष्ट्रपति को भेंट कीं। राष्ट्रपति ने कहा कि इन पुस्तकों के शीर्षक समावेशी लोकतंत्र में हमारी आस्था को प्रतिबिंबित करते हैं और ये पाठकों को राष्ट्रपति भवन की परंपराओं, कार्यप्रणाली तथा उसके विविध आयामों से परिचित करायेंगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि चार वर्ष पहले 25 जुलाई को भारत के राष्ट्रपति का पद ग्रहण करना उनके लिए सम्मान से अधिक एक जिम्मेदारी थी और उन्होंने पिछले चार वर्षों में इसी दायित्वबोध के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि वे युवाओं को नैतिक मूल्यों पर कायम रहने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, जनजातीय समुदायों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए विकास की मुख्यधारा से जुड़ने तथा विदेशों में रहने वाले भारतीयों को भारत की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए प्रेरित करती रही हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु ने पिछले चार वर्षों में गरिमा, विनम्रता, विवेक तथा संविधान के अक्षर और भावना के प्रति प्रतिबद्धता के साथ राष्ट्रपति पद की प्रतिष्ठा को और समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि ओडिशा के एक दूरस्थ जनजातीय गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक उनकी यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और समावेशिता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु के कार्यकाल की विभिन्न पहलों ने राष्ट्रपति पद को जनता के और निकट लाने तथा औपनिवेशिक मानसिकता से आगे बढ़ने की दिशा में योगदान दिया है।

 

 

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