वाशिंगटन, 28 जुलाई (वार्ता) इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए वाशिंगटन रवाना हो गये। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच होने वाली वार्ता में ईरान, गाजा, लेबनान और व्यापक पश्चिम एशियाई सुरक्षा पर चर्चा होगी।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय रणनीति को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। श्री नेतन्याहू ने वाशिंगटन रवाना होने से पहले कहा, “मैं हमारे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के लिए वाशिंगटन जा रहा हूं। उनके दूसरे कार्यकाल के चुनाव के बाद यह हमारी आठवीं मुलाकात होगी। हमारी चर्चा का सबसे प्रमुख विषय ईरान होगा। हमारा उद्देश्य इज़रायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्र में शांति के दायरे का विस्तार करना है।” उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का स्पष्ट उद्देश्य इज़रायल की सुरक्षा, मजबूती और भविष्य को सुनिश्चित करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि वह अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी शामिल होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, यह यात्रा अमेरिका-इज़रायल संबंधों के लिए संवेदनशील समय में हो रही है। हालांकि ट्रंप और श्री नेतन्याहू सार्वजनिक रूप से अपने घनिष्ठ संबंधों पर जोर देते रहे हैं, लेकिन हाल के महीनों में ईरान, लेबनान और पश्चिम एशिया में अमेरिकी नीति की दिशा को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं। जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंचता गया, ट्रंप प्रशासन ने युद्ध समाप्त करने की दिशा में प्रगति नहीं होने पर असंतोष जताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान श्री ट्रंप ने कथित तौर पर श्री नेतन्याहू के फैसलों की आलोचना करते हुए कहा था कि “मेरे बिना इज़रायल नहीं होता।” रिपोर्ट के अनुसार, इन टिप्पणियों ने युद्ध को लेकर दोनों नेताओं के अलग-अलग दृष्टिकोण को उजागर किया। जहां इज़रायल ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने का पक्षधर है, वहीं श्री ट्रंप हाल के समय में कूटनीतिक समाधान की दिशा में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, श्री ट्रंप के समक्ष श्री नेतन्याहू ईरान के परमाणु और सैन्य कार्यक्रम से जुड़ी नयी खुफिया जानकारी प्रस्तुत कर सकते हैं। साथ ही वह यह आश्वासन भी चाहेंगे कि भविष्य में अमेरिका की किसी भी कूटनीतिक पहल या क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था से इज़रायल की सामरिक बढ़त प्रभावित न हो। उनके अब्राहम समझौते के विस्तार, दीर्घकालिक अमेरिका-इज़रायल रक्षा ढांचे तथा सऊदी अरब और तुर्की से जुड़े अमेरिकी प्रस्तावों पर भी चर्चा करने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, श्री ट्रंप द्वारा सऊदी अरब के साथ परमाणु समझौते की घोषणा के बाद इज़रायल इस विषय पर भी अपनी चिंताएं व्यक्त कर सकता है।रिपोर्ट में कहा गया है कि लेबनान का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच मतभेद का कारण बना हुआ है। श्री ट्रंप युद्धविराम व्यवस्था को मजबूत करने के पक्ष में हैं, जबकि श्री नेतन्याहू का कहना है कि हिजबुल्ला के निरस्त्रीकरण से पहले इज़रायली सेना पूरी तरह पीछे नहीं हट सकती।
तुर्की को संभावित अमेरिकी हथियार बिक्री और अमेरिका-सऊदी असैन्य परमाणु समझौते को लेकर भी इज़रायल ने सावधानी बरतने की बात कही है। यह यात्रा श्री नेतन्याहू के लिए घरेलू राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस वर्ष के अंत में होने वाले चुनावों से पहले श्री ट्रंप के साथ उनकी निकटता उनके लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश मानी जा रही है, हालांकि क्षेत्रीय रणनीति को लेकर दोनों नेताओं के बीच वास्तविक सहमति को लेकर सवाल बने हुए हैं। फिलहाल श्री ट्रंप और श्री नेतन्याहू की किसी संयुक्त सार्वजनिक उपस्थिति की घोषणा नहीं की गयी है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच होने वाली निजी वार्ता में ईरान, गाजा, लेबनान, क्षेत्रीय सामान्यीकरण की प्रक्रिया तथा भविष्य में अमेरिका-इज़रायल सुरक्षा सहयोग प्रमुख विषय रहेंगे।

