इंदौर: तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और डिजिटल खतरों के दौर में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे समय में शासकीय होलकर विज्ञान महाविद्यालय, इंदौर का साइबर सुरक्षा विभाग प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है.वर्ष 2023 में बीएससी साइबर सिक्योरिटी (ऑनर्स) पाठ्यक्रम शुरू करने वाला यह मध्य प्रदेश का पहला सरकारी महाविद्यालय बना और पिछले तीन वर्षों से संचालित अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा प्रयोगशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को इंडस्ट्री-लेवल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है. अब इस विभाग से 33 प्रशिक्षित विद्यार्थियों की पहली बैच तैयार हो चुकी है, जो साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार है.
तीन वर्षों से संचालित आधुनिक साइबर लैब्स
महाविद्यालय में स्थापित साइबर सिक्योरिटी एसेंशियल लैब, डिजिटल फॉरेंसिक्स लैब तथा एडवांस्ड साइबर सिक्योरिटी एवं पेनेट्रेशन टेस्टिंग लैब पिछले तीन वर्षों से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रही हैं. इन प्रयोगशालाओं में छात्र केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वास्तविक साइबर सुरक्षा वातावरण में कार्य करने का अनुभव भी प्राप्त करते हैं. साइबर सिक्योरिटी एसेंशियल लैब में नेटवर्क सिक्योरिटी, डिजिटल फॉरेंसिक्स, आईओटी सुरक्षा, इंडस्टि्रयल सिक्योरिटी और फिजिकल सिक्योरिटी से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है.
यहां सर्विलांस सिस्टम, एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, इंडस्टि्रयल कंट्रोल सिस्टम और एंटरप्राइज नेटवर्किंग इंफ्रास्ट्रख्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. डिजिटल फॉरेंसिक्स लैब में अत्याधुनिक फॉरेंसिक वर्कस्टेशन, राइट ब्लॉकर, एविडेंस कलेक्शन किट और डिजिटल विश्लेषण उपकरणों की सहायता से विद्यार्थियों को साइबर अपराधों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों के संग्रह, संरक्षण और विश्लेषण का प्रशिक्षण दिया जाता है. वहीं एडवांस्ड साइबर सिक्योरिटी एवं पेनेट्रेशन टेस्टिंग लैब में नियंत्रित वातावरण में एथिकल हैकिंग, वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और पेनेट्रेशन टेस्टिंग जैसी तकनीकों का अभ्यास कराया जाता है, जिनकी उद्योग जगत में लगातार मांग बढ़ रही है.
पहली बैच तैयार, उद्योग और समाज को मिलेगा लाभ
महाविद्यालय के साइबर सुरक्षा विभाग से प्रशिक्षित विद्यार्थियों की पहली बैच अब तैयार हो चुकी है. इन विद्यार्थियों ने आधुनिक साइबर सुरक्षा तकनीकों, डिजिटल फॉरेंसिक्स, नेटवर्क डिफेंस और एथिकल हैकिंग जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक दक्षता हासिल की है. उम्मीद है कि यह बैच सरकारी और निजी संस्थानों के साथ-साथ साइबर अपराध नियंत्रण, डिजिटल फॉरेंसिक्स और सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा प्रदेश में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने में योगदान देगी.
बदल रहे हैं साइबर अपराध के तरीके
विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ठगी, फिशिंग ईमेल, नकली एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश, फर्जी क्यूआर कोड, डीपफेक वीडियो एवं आवाज, बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज (बीईसी), फर्जी नौकरी के ऑफर, नकली केव्हायसी अपडेट और निवेश योजनाओं के माध्यम से लोगों को निशाना बना रहे हैं.
साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने पर भी कार्य
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमिला कोरी ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे दक्ष साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ तैयार करना है जो साइबर अपराध नियंत्रण, डिजिटल फॉरेंसिक्स, सूचना सुरक्षा और एथिकल हैकिंग जैसे क्षेत्रों में उद्योग एवं समाज की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें. उन्होंने कहा कि विभाग तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ समाज में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है.
अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं नई पहचान देंगी
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. अनामिका जैन ने कहा कि होलकर साइंस कॉलेज विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है. अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा प्रयोगशालाएं विद्यार्थियों को रोजगार, शोध और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक दक्षता प्रदान करेंगी तथा मध्य प्रदेश में साइबर सुरक्षा शिक्षा को नई पहचान देंगी
