नयी दिल्ली, 26 जुलाई (वार्ता) यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर भारतीय चालक दल के चार सदस्यों को ले जा रहे एक वाणिज्यिक पोत पर हुए हमले के बाद से दो भारतीय नागरिक लापता हैं और दो अन्य सुरक्षित हैं। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने यह जानकारी दी है। इस बीच, भारत ने अपने नागरिकों को संघर्षग्रस्त काला सागर क्षेत्र में नाविकों के लिए बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के प्रति आगाह किया है। दूतावास ने कहा कि वह एमवी जीएन राग्नार से जुड़ी इस घटना के बाद स्थिति पर लगातार नजर बनाये हुए है, जिस पर 25 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह पर हमला हुआ था। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि पोत पर चार भारतीय नागरिक सवार थे। इनमें से दो नागरिकों के सुरक्षित होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि शेष दो का अभी कोई सुराग नहीं मिला है। उनकी तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है और दूतावास वहां के स्थानीय अधिकारियों के लगातार संपर्क में है। यह घटना काला सागर से गुजरते समय 18 जुलाई को एक अन्य वाणिज्यिक पोत पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक के मारे जाने के दो दिन बाद सामने आयी है। इस हालिया घटना के साथ ही यूक्रेन युद्ध में मारे गये भारतीय नाविकों की संख्या बढ़कर पांच हो गयी है। हालिया हमलों के बाद भारत सरकार ने एक एडवायजरी जारी कर अपने नागरिकों से संघर्ष प्रभावित काला सागर क्षेत्र में चलने वाले या वहां से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर नौकरी स्वीकार करने से पहले ‘अत्यधिक सावधानी’ बरतने का आग्रह किया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जारी संघर्ष के कारण काला सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि क्षेत्र में काम करने वाले वाणिज्यिक जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों सहित गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। एडवायजरी में भारतीय नाविकों से कहा गया है कि वे काम स्वीकार करने से पहले सुरक्षा जोखिमों का मूल्यांकन करें और नियोक्ताओं, भर्ती एजेंसियों तथा जहाज ऑपरेटरों से पोत के मार्गों, रुकने वाले बंदरगाहों, सुरक्षा व्यवस्था, बीमा कवर और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रियाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें। उन्हें यह सुनिश्चित करने की भी सलाह दी गयी है कि रोजगार की शर्तें अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के अनुरूप हों और आपात स्थिति में चिकित्सा देखभाल, निकासी, स्वदेश वापसी और मुआवजे के पर्याप्त प्रावधान शामिल हों। भारतीय नागरिकों को सलाह दी गयी है कि वे अपने यात्रा कार्यक्रम के बारे में परिजनों को सूचित रखें, नियमित संपर्क बनाये रखें और समुद्री अधिकारियों तथा पोत ऑपरेटरों के जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। इससे पहले, भारत ने रूस के कार्यवाहक राजदूत व्लादिमीर लादानोव को तलब किया था और ओडेसा के पास वाणिज्यिक पोत ‘एमवी गोल्डन लियो’ पर हुए हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था, जिसमें चार भारतीय चालक दल के सदस्य मारे गये थे।
विदेश मंत्रालय ने 19 जुलाई को हुए इस हमले पर ‘गंभीर चिंता ‘ करते हुए कहा कि नागरिक वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर किये जाने वाले हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा हैं। विदेश मंत्रालय ने रूसी राजनयिक से कहा, “वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और इसके परिणामस्वरूप निर्दोष नागरिकों की जान जाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इससे बचा जाना चाहिए।” इसके साथ ही मंत्रालय ने उन्हें भारत की चिंताओं से रूस को अवगत कराने को कहा।यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर नजर रख रहा है और प्रभावितों को सहायता प्रदान कर रहा है। भारत ने दोहराया है कि अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार नागरिक जहाजों की आवाजाही और नेविगेशन की स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए।

