भोपाल। नगर निगम में हाल ही में हुई पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के पालन में निगम ने विभिन्न वर्गों के कर्मचारियों को पदोन्नति दी है. इनमें 14 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी में पदोन्नत किया गया है.
सूत्रों का दावा है कि पदोन्नति में आरक्षण नियमों का पालन किया गया, लेकिन तृतीय श्रेणी के पदों के लिए निर्धारित कुछ शैक्षणिक एवं तकनीकी पात्रताओं, जैसे हिंदी-अंग्रेजी टाइपिंग तथा सीपीसीटी/पीजीडीसीए योग्यता, के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2009 में सामान्य प्रशासन विभाग ने लिपिकीय पदों के लिए हिंदी-अंग्रेजी टाइपिंग और सीपीसीटी/पीजीडीसीए जैसी योग्यताओं को अनिवार्य किया था. सूत्रों का यह भी कहना है कि वर्ष 2014 में भी इसी तरह की पदोन्नति प्रक्रिया अपनाई गई थी.
इस बीच, उद्योग विभाग और विक्रम विश्वविद्यालय में पात्रता संबंधी नियमों के पालन को लेकर पदोन्नति निरस्त किए जाने की चर्चाओं का भी हवाला दिया जा रहा है. हालांकि, इन मामलों और नगर निगम की वर्तमान पदोन्नति प्रक्रिया के बीच समानता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
इनका कहना है
निगम में पदोन्नति के समय सभी नियमों और पात्रता का ध्यान रखते हुए की गई हैं.
– वरुण अवस्थी, अपर आयुक्त नगर निगम
