नयी दिल्ली, (वार्ता) राष्ट्रीय स्ववंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि अंग्रेजों ने हमारे दिमाग़ को बदल कर यह साबित करने की कोशिश की कि हमारा अध्यात्म और परंपराएं ग़लत हैं और उनका विज्ञान सही है।
श्री भागवत ने शुक्रवार को यहां विश्वमांगल्या सभा की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “ हम अपने आप को, अपनी परम्परों और अपने अध्यात्म को भूल गए हैं। उसे फिर से जानने का समय आ गया है।”
उन्होंने कहा कि तथागत के समय में हमारी परंपराएं फिर से स्थापित हुईं, लेकिन उसके बाद देश पर आक्रमणों का सिलसिला शुरू हुआ और आखिर में जो आए यानी अंग्रेजों ने तो हमारे दिमाग को ही बदल डाला। उन्होंने हमारे मन में ऐसा भ्रम पैदा किया कि हमारा अध्यात्म और परंपराएं भांग और गंजा तथा नशेड़ियों में घायल संगीत है और उनका विज्ञान सही है।
संघ प्रमुख ने कहा कि देश पर आक्रमण का सिलसिला शुरू होने की वजह से चीजें जो हमारी परंपरा का हिस्सा नहीं थीं और हमारे विचारों की दिशा में नहीं थीं, उन्हें स्वीकार करना पड़ा था। कुछ चीजें हमने अपनी सुरक्षा के लिए और कुछ विदेशी आक्रमणकारियों के दबाव में स्वीकार की। उन्होंने कहा कि युगानुकूल मातृत्व विषय पर मुझे बोलने के लिए कहना यह अपने आप में एक विरोधाभास है। एक तरह इस पर एकाधिकार महिलाओं का है, इस पर पुरुषों का बोलना ठीक नहीं है। इस विषय पर विश्वमांगल्य सभा द्वारा व्यापक चर्चा हो गई है, और इस विषय में अपना दृष्टिकोण क्या है, अपनी परंपरा क्या है, आज के युग में कैसे चलना आदि के बारे में भी पुराने समय से बहुत सारा चिंतन हुआ है।
स्वामी विवेकानंद जी, गांधी जी, रविंद्र नाथ ठाकुर जी आदि ने समग्रता से चिंतन करके हमारे सामने विचार रखे हैं।
कार्यक्रम का विषय दिया गया है – युगानुकूल मातृत्व। मातृत्व की शाश्वत बातें वही हैं, वह युग के अनुसार बदलती नहीं। उन बातों के कारण युग में परिवर्तन करने वाले उत्पन्न होते हैं। आदिकाल से सृष्टि मातृत्व के आधार पर ही चलती आई है। हर जीव की उत्पत्ति होती है तो उसमें मातृत्व आता ही है, माता रहती ही है। सृष्टि का सृजन, संवर्धन, पोषण, यह बिना मातृत्व के संभव नहीं है। मातृत्व सृष्टि के संवर्धन, पोषण और निरंतरता का मूल आधार है। मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति उसका विचार है, लेकिन उसे सही दिशा देने का कार्य माता ही करती है। माता ही मनुष्य की पहली गुरु होती है तथा जीवनभर भावनात्मक संबल का सबसे बड़ा केंद्र भी वही रहती है।
उन्होंने कहा कि परिवार में समय देना और संवाद बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान माता-पिता को करना होगा, जिसके लिए स्वयं का ज्ञान भी निरंतर बढ़ाना आवश्यक है। बच्चे उपदेश से अधिक अनुकरण से सीखते हैं, इसलिए माता-पिता को स्वयं आदर्श आचरण प्रस्तुत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज में अनेक विमर्श भ्रम के कारण चलते हैं और कई बार जानबूझकर भ्रम भी फैलाया जाता है। भारतीय संस्कृति के बारे में भी लंबे समय तक भ्रम फैलाया गया कि हमारी परंपराएं गलत हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि हमारा सांस्कृतिक आधार अत्यंत प्रबल और प्रत्यक्ष है। हमें अपने इतिहास, ज्ञान और परंपराओं पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एकता ही सत्य है और विविधता के बीच एकात्म भाव भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है। भारत में रहते हुए भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के अनुरूप जीवन जीना चाहिए। अन्य देशों की जीवनशैली को बिना विचार किए अपनाने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर समाज और परिवार व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, केंद्रीय मंत्री अनशुईया पटेल, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, भाजपा सांसद कंगना रनौत, दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, मनजिंदर सिंह सिरसा, कपिल मिश्रा और दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता सहित कई अन्य गणमान्य लोग तथा देश भर से आई सैकड़ों महिलाएं मौजूद थीं।
