1160 करोड़ रुपये के चावल घोटाले की हो उच्चस्तरीय जांच 

बालाघाट, मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चित बालाघाट जिले के कथित 1160 करोड़ रुपये के चावल घोटाले का मामला अब और अधिक गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे ने शुक्रवार को मंत्री गोविंद सिंह राजपूत अब मुख्य सचिव से मुलाकात किया ।

विधायक अनुभा मुंजारे ने मंत्री एवं मुख्य सचिव को अवगत कराया कि बालाघाट जिले में राइस मिलर्स एवं एथेनॉल प्लांट संचालकों द्वारा शासन के चावल के दुरुपयोग एवं अनियमितताओं से जुड़ा यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि किसानों, गरीबों, महिलाओं, बच्चों , सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा शासन के वित्तीय हितों से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि यदि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो शासन को हुए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ आम जनता का विश्वास भी प्रभावित होगा।

अपने पत्र में विधायक ने कहा कि पूरे मामले की किसी सक्षम एवं स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्चस्तरीय समिति से जांच कराई जाए, ताकि बिना किसी दबाव के सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण हो सके। उन्होंने विशेष रूप से मांग की कि बालाघाट से भेजे गए सभी 44 ट्रकों के परिवहन, दस्तावेजों एवं रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कराई जाए। इसके साथ ही संबंधित एथेनॉल प्लांट, परिवहनकर्ताओं, राइस मिलों तथा वेयरहाउस संचालकों की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जाए।

विधायक ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकरण के तार मध्य प्रदेश से बाहर महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश तक जुड़े होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसलिए इन राज्यों से जुड़े संभावित नेटवर्क,वित्तीय लेन-देन, परिवहन श्रृंखला तथा संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं की भी गहन जांच की जाए, ताकि पूरे रैकेट का खुलासा हो सके। उन्होंने मांग की कि जांच में जो भी व्यक्ति या संस्था दोषी पाई जाए, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसके विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही शासन को हुई आर्थिक क्षति का वैज्ञानिक आकलन कर संबंधित दोषियों से पूरी राशि की वसूली भी की जाए

विधायक ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और वहां जनता की आवाज मजबूती से उठाना जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बालाघाट जिले में हुए इस कथित चावल घोटाले की न्यायिक जांच कराई जाना अत्यंत आवश्यक है। जब तक दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक मेरा संघर्ष जारी रहेगा। राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में भी इस मामले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होती है तो इससे चावल के परिवहन, भंडारण, मिलिंग तथा एथेनॉल उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। साथ ही यदि अंतरराज्यीय नेटवर्क की पुष्टि होती है तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।

भोपाल में हुई इस मुलाकात के बाद बालाघाट के कथित चावल घोटाले का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का केंद्र बन गया है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस गंभीर मामले में जांच की दिशा क्या तय होती है और शासन इस पर क्या निर्णय लेता है। यदि उच्चस्तरीय जांच का आदेश जारी होता है, तो यह मामला प्रदेश के सबसे चर्चित आर्थिक प्रकरणों में शामिल हो सकता है।

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