
नीमच। जिले के सीआरपीएफ परिसर में जवान का शव मिलने से सनसनी फैल गई है। इस रहस्यमयी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। झाडिय़ों के बीच मिला यह शव जैसे ही सामने आया, पूरे परिसर में हडक़ंप मच गया और जवानों से लेकर अधिकारियों तक में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
शव की पहचान नंदकिशोर प्रजापति पिता अमरचंद प्रजापति निवासी भीम, जिला राजस्थान के रूप में हुई है। मृतक के परिजनों ने हाथ में पहने कड़े के आधार पर कंकाल की पहचान की। परिजनों का कहना है कि यही कड़ा नंदकिशोर हमेशा पहना करते थे, जिसे देखकर वे भावुक हो गए और रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
नीमच से दिल्ली तक शिकायत, फिर भी अनसुनी रही पुकार
27 दिसंबर 2025 को अचानक लापता हुए नंदकिशोर को लेकर परिजनों की बेचैनी दिन-ब-दिन बढ़ती रही, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। परिजनों का आरोप है की सीआरपीएफ अधिकारियों ने को यह कहकर टाल दिया कि नंदकिशोर 50 दिनों की छुट्टी लेकर घर के लिए निकला है। जब कई दिन बीतने के बाद भी वह घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने बार-बार नीमच सीआरपीएफ कार्यालय के चक्कर काटे, मगर हर बार उन्हें यही जवाब मिला कि छुट्टियों की अवधि पूरी होने के बाद ही तलाश शुरू की जाएगी।
बेबस परिजनों ने हार नहीं मानी और मामला नीमच कैंट पुलिस तक पहुंचाया। इसके बाद दिल्ली स्थित सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया गया। नीमच से दिल्ली तक शिकायतों की आवाज गूंजती रही, लेकिन अफसोस, किसी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिजनों की गुहार फाइलों में दबती चली गई और एक जवान की तलाश समय पर शुरू ही नहीं हो सकी।
44 दिन बाद मिला शव
लापता हुए 44 दिन बाद सीआरपीएफ परिसर की झाडिय़ों में काम कर रहे जवानों को एक शव दिखाई दिया, जिससे हडक़ंप मच गया। सूचना पर अधिकारी और परिजन मौके पर पहुंचे। परिजनों ने शव के हाथ में पहने कड़े से नंदकिशोर प्रजापति की पहचान की। इस दर्दनाक खुलासे ने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया और सिस्टम की लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए।
मृतक के भाई का आरोप
मृतक नंदकिशोर प्रजापति के भाई ने इस पूरे मामले को गंभीर रूप से संदिग्ध बताया है। उनका कहना है कि नंदकिशोर के साथ कोई बड़ी और गंभीर घटना हुई है, जिसे दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष और गहन जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की अपील की है। साथ ही मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की भी मांग की गई है। सीआरपीएफ परिसर के भीतर जवान का कंकाल मिलना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर 44 दिनों तक यह मामला कैसे नजरअंदाज होता रहा।
कैंट थाना प्रभारी का बयान
नीमच कैंट थाना प्रभारी ने पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि मृतक नंदकिशोर प्रजापति के परिजनों द्वारा गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए नीमच कैंट पुलिस की टीम द्वारा दो बार भोपाल, उज्जैन, रतलाम और नागदा जाकर तलाश की गई। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले गए, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। थाना प्रभारी ने बताया कि रविवार को नंदकिशोर का शव सीआरपीएफ परिसर के अंदर ही मिला है, जिसकी पहचान परिजनों द्वारा कर ली गई है। नियमानुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंपा जाएगा। मामले की जांच जारी है।
