
मंदसौर। मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता हासिल करने वाली मंदसौर की बेटी डॉ. खुशबू सिसोदिया का चयन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से क्रीड़ा अधिकारी (स्पोर्ट्स ऑफिसर) के पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है। खेल, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली डॉ. सिसोदिया अब जिले के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं।
डॉ. खुशबू सिसोदिया की प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय, मंदसौर से हुई। बचपन से ही उनकी रुचि खेलों, विशेष रूप से हॉकी, की ओर रही। उन्होंने छठी कक्षा से हॉकी खेलना शुरू किया और स्कूल में स्पोर्ट्स कैप्टन के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान उन्होंने स्कूल गेम्स की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी विद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। खेलों ने उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और टीम भावना जैसे गुण विकसित किए।
उच्च शिक्षा के लिए वर्ष 2015 में उन्होंने लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (LNIPE), ग्वालियर में प्रवेश लिया, जहां से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (NSNIS), पटियाला से हॉकी में खेल प्रशिक्षण डिप्लोमा प्राप्त किया।
शिक्षा के प्रति विशेष रुचि के चलते उन्होंने एलएनआईपीई, ग्वालियर से पीएच.डी. की उपाधि हासिल की। इसी दौरान उन्होंने यूजीसी-नेट परीक्षा भी उत्तीर्ण कर यह साबित किया कि खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में समान रूप से उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है।
एमपीपीएससी के माध्यम से क्रीड़ा अधिकारी के पद पर चयनित होने के बाद डॉ. सिसोदिया ने कहा कि उनका उद्देश्य जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। उनका मानना है कि खेल और शिक्षा का समन्वय युवाओं के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. खुशबू सिसोदिया ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता श्रीमती दुर्गेश नंदिनी एवं नरेन्द्र सिंह सिसोदिया के साथ-साथ अपने गुरुजनों को दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के विश्वास और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने हर कठिन दौर में उन्हें आगे बढ़ने का संबल दिया।
डॉ. खुशबू सिसोदिया की सफलता यह संदेश देती है कि स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर मेहनत और परिवार व गुरुजनों के सहयोग से किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है। उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे मंदसौर जिले के लिए गर्व का विषय है।
