गुदड़ी में लिपटी आदिवासी किशोरी के शव को हाथों में ले जाने मबजूर हुए परिजन

अशोकनगर। रविवार दोपहर को डेढ़ बजे जब पारा 40 डिग्री के पार था और जमीन भट्टी जैसे तप रही थी। ऐसी भीषण गर्मी में बहादुरपुर कस्बे में सड़क किनारे एक आदिवासी किशोरी का शव सड़क किनारे गुदड़ी में लिपटा हुआ रखा था। इस शव के पास में किशोरी का भाई और बहनाई खड़े हुए थे। जिन्होंने बताया कि शनिवार शाम को किशोरी का शव अपने घर में फंदे पर लटका पाया गया था, जिसे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बहादुरपुर लाया गया। चूंकि रात हो चुकी थी इसलिए पोस्टमार्टम रविवार सुबह दस बजे किया गया। इसके बाद परिजनों ने शव को घर तक पहुंचाने के लिए पुलिस, 112 हेल्पलाईन नंबर और जिला अस्पताल के शव वाहन का प्रबंध करने के काफी प्रयास किए साथ ही निजी ऑटो टैक्सी वालों के भी मान-मनौव्वल किए लेकिन करीब साढ़े तीन घंटे तक जब शव को घर तक ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं हुई तो उन्हे मजबूरन हाथों में ही उठाकर शव को घर तक ले जाने का मन बनाना पड़ा। परिजन शव को अस्पताल से करीब दो सौ मीटर दूर तक ले आए थे, इतने में इसकी जानकारी आमजनों को हुई तो एक कार की व्यवस्था कर शव को घर तक पहुंचाया गया।

इस घटना में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। जिसमें अजा वर्ग की एक किशोरी की संदेहास्पद मौत के बाद भी उसके शव को न तो किसी कपड़े या पॉलीथिन में लपेटा गया और न ही उसे घर तक पहुंचाने के लिए कोई साधन की व्यवस्था की गई। यही नहीं किशोरी के शव को पोस्टमार्टम कक्ष से बाहर तक लाने के लिए स्ट्रेचर एवं वार्डबॉय नहीं लाए बल्कि परिजन स्वंय उसे हाथों में उठाकर लाए।

महिला पुलिसकर्मी का मौजूद होना जरूरी

मृतक किशोरी के भाई धासीराम आदिवासी ने बताया कि घटना के बाद जब पुलिस को सूचना दी गई तो मौके पर पुरुष पुलिसकर्मी ही पहुंचे थे। कुछ देर बाद तहसीलदार बहादुरपुर भी आ गए। जिनके साथ में शव को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया। किशोरी के शव को साथ लाने के लिए कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं लाई गई थी। हालांकि रविवार सुबह जब पोस्टमार्टम हो रहा था तब एसडीओपी मुंगावली जरूर अस्पताल में आ गई थीं।

रात भर जागकर खुद की रखवाली

बहादुरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र परिसर के एक कोने में 64 वर्गफीट का पोस्टमार्टम कक्ष बना हुआ है। इस कक्ष के चारों ओर कचरे के ढेर लगे हैं और नालियों का गंदा पानी जमा रहता है। साथ ही झाड़ भी खड़े हुए हैं। पुलिस ने षव को पोस्टमार्टम कक्ष में रखवा दिया लेकिन इसके बाद सारी रात जागकर परिजनों को शव की रखवाली आवारा कुत्तों एवं चूहों से करनी पड़ी। परिजनों ने बताया कि कक्ष में ताला लगा हुआ था लेकिन वहां रखवाली की कोई व्यवस्था नहीं थी।

इनका कहना है

‘पोस्टमार्टम वाले मामलों में शव को अस्पताल तक लाने, उसकी सुरक्षा करने, पोस्टमार्टम कराने एवं पोस्टमार्टम उपरांत शव को घर तक पहुंचाने की व्यवस्था पुलिस की होती है। हमारे अस्पताल में शव वाहन नहीं है, जिला अस्पताल से शव वाहन बुलाने के प्रयास कई बार किए हैं जो असफल साबित हुए।’

डॉ. यशवंत सिंह तोमर, सेक्टर मेडिकल ऑफिसर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बहादुरपुर

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