
भोपाल। जीआरपी भोपाल की टीम ने एक ऑटो में लावारिस मिली डेढ़ माह की बच्ची के माता-पिता को ढूंढ निकाला. बुधवार को जीआरपी ने लगातार 11 दिन के अंदर पुणे पहुंचे परिजनों की तलाश में सफलता मिली. जीआरपी का ऑपरेशन हमदर्द जारी है.
पुलिस अधीक्षक रेलवे अंकित जायसवाल ने बताया कि बिहार के रहने वाले बच्ची के माता-पिता पूना शहर में रहकर मजदूरी कर अपने बच्चों भरण पोषण करते है. उनके 5 बच्चे हैं, तीन 3 बच्चे अपनी दादी के साथ बिहार में ही रहते है. एक बेटी और मासूम बच्ची माता-पिता के साथ थी. 10 जुलाई को मासूम बच्ची को भोपाल में छोड़कर सभी पुणे चले गए थे.
जीआरपी की पूछताछ में आरोपी पिता ने बताया कि आर्थिक स्थिति से परेशान होकर बच्ची को लावारिस हालात में छोड़ दिया था. मासूम बच्ची को भी उसकी दादी के पास माता-पिता छोड़ने जा रहे थे. इस दौरान उनकी एक और बेटी भी साथ ही थी. भोपाल स्टेशन उतरने पर उन्होंने अपना फैसला बदला और बच्ची को आटो में छोड़कर पुणे के लिए ट्रेन से रवाना हो गए. सोशल मीडिया और सभी जगह पुलिस की सक्रियता से जब बच्ची की फोटो और वीडियो के माध्यम से यह खबर पिता को जब मिली, तो उन्हें अपने किये पर भी पछलावा हुआ. बच्ची की मां मानसिक रुप से विक्षिप्त बताई गई है. आरोपीगण (माँ और पिता) के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. बच्ची के माता-पिता है और उसकी एक बहन वर्तमान में थाना जीआरपी भोपाल की अभिरक्षा में है. बच्ची के संबंध में अग्रिम निर्णय सीडब्ल्यूसी संस्था द्वारा लिये जाने के लिए संस्था को भी सूचित किया गया है.
पुलिस अधीक्षक रेलवे ने बताया कि दूधमुही बच्ची की मासूम संवेदना को महसूस कर जीआरपी की टीम का प्रयास लगातार जारी रहा. कई स्थानों पर लगे सीसीटीव्ही कैमरे की फुटेज खंगाली गई. बच्ची और उसके माता-पिता की फोटो भी पुणे रेलवे स्टेशन सहित स्थानों पर चस्पा किए गए. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर उनकी तलाशी की मुहिम जारी रही. बीते 10 जुलाई को रेलवे स्टेशन भोपाल के प्लेटफार्म नंबर 6 की तरफ स्टैण्ड पर खडे आटो में छोड़ा गया. सीसीटीव्ही फुटेज में माता-पिता विण्डो काउंटर से पूना स्टेशन का जनरल टिकिट लेकर यात्रा पर पूना गए थे.
