
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश में लागू ई-विकास (डिस्ट्रीब्यूशन एंड एग्रीकल्चर फर्टिलाइजर सप्लाई सॉल्यूशन सिस्टम) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और गैर-कृषि उपयोग रोकने के लिए बनाई गई यह व्यवस्था केंद्र सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसमें न्यायालय सीमित परिस्थितियों में ही हस्तक्षेप कर सकता है।
दरअसल, कृषि आदान विक्रेता संघ की ओर से वरिष्ठ सदस्य जबलपुर निवासी जयेश ओझा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया था कि ई-टोकन प्रणाली लागू होने से इंटरनेट और तकनीकी जानकारी के अभाव में किसानों और उर्वरक विक्रेताओं को परेशानी हो रही है। साथ ही इसे उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के विपरीत बताया गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल के साथ अधिवक्ता अमन गुप्ता ने पैरवी की। राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता सुयश ठाकुर उपस्थित हुए।
