नयी दिल्ली, 21 जुलाई (वार्ता) कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित विभिन्न नेताओं को प्रधानमंत्री आवास के बाहर छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के करीब तीन घंटे बाद मंगलवार रात को रिहा कर दिया गया।
श्री गांधी को छत्रसाल स्टेडियम से रिहा किया गया, जबकि श्रीमती वाड्रा समेत कुछ अन्य नेताओं को पहले मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया था। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी अपनी पुत्री प्रियंका तथा हिरासत में लिए गये अन्य नेताओं से मिलने मंदिर मार्ग थाने पहुंची थीं। बाद में सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया।
श्रीमती वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता को संसद में बोलने की अनुमति नहीं दी जाती और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिलती, तो विपक्ष अपनी बात वहां रखेगा जहां संभव होगा। उन्होंने कहा कि देश के बच्चों और युवाओं की जायज मांगों को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध सबका मौलिक अधिकार है।
उन्होंने कहा, “हमारी मांग शुरू से स्पष्ट है। देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होना चाहिए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए, इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा के बजाय बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करने पर अधिक ध्यान दिया है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किये गये हैं।
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगें स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया, छात्र-छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ और लोकतंत्र में इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है। पूरा विपक्ष इस मुद्दे को संसद के भीतर भी मजबूती से उठायेगा।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार ने लगातार दूसरे दिन भी दमनकारी रवैया अपनाया। विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे पर चर्चा के लिए नियमों के तहत नोटिस दिया था, लेकिन सरकार चर्चा से बच रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।