​सौसर में मार्च में ही मई जैसी तपन, पारा 38 डिग्री पहुँचा, जल संकट की आहट

सौसर। क्षेत्र में इस बार मौसम के मिजाज ने समय से पहले ही तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मार्च के दूसरे सप्ताह में ही सूर्य की तपिश इतनी तेज हो गई है कि लोगों को मई-जून जैसी भीषण गर्मी और लू का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को सौसर का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने पिछले कुछ वर्षों के रिकॉर्ड की ओर इशारा कर दिया है।

दोपहर में थम रही सड़कों पर आवाजाही

​तापमान में आए इस अचानक उछाल ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सुबह 11 बजते ही सूर्य की किरणें चुभने लगती हैं और दोपहर होते-होते गर्म हवाएं लू का अहसास करा रही हैं। आलम यह है कि दोपहर के समय मुख्य बाजारों और सड़कों पर आवाजाही काफी कम हो गई है। लोग चेहरे को ढंककर और ठंडे पेय पदार्थों का सहारा लेकर गर्मी से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

​पाताल में जा रहा पानी, किसान और ग्रामीण चिंतित

​गर्मी के इस शुरुआती हमले ने सबसे ज्यादा चिंता जल स्रोतों को लेकर बढ़ा दी है। क्षेत्र के अधिकांश कुओं का जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है।​ जानकारी के अनुसार कई इलाकों में कुएं सूखने की कगार पर हैं। यही नही गिरते वाटर लेवल से रबी की फसलों और बगीचों की सिंचाई को लेकर किसान पशोपेश में हैं।

प्रशासन के लिए चुनौती

​यदि मार्च महीने के शुरुआती दिनों में ही पारा 38 डिग्री के पार जा सकता है, तो आने वाले दो महीनों में स्थिति कितनी गंभीर होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते पेयजल आपूर्ति की ठोस योजना नहीं बनाई, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में गंभीर जल संकट खड़ा होना तय है।

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