नयी दिल्ली, 21 जुलाई (वार्ता) राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने शोध एवं तकनीक आधारित अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) तथा सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) जैसे सरकारी शोध संस्थानों के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित डेटा साझा करने की नई रूपरेखा जारी की है।
एनएचएआई ने मंगलवार को बताया कि इस पहल का उद्देश्य सड़क अवसंरचना और यातायात प्रबंधन से जुड़े शोध को गति देना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास में नवाचार को बढ़ावा देना है। एनएचएआई का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक शोध प्रस्ताव के लिए अलग-अलग समझौता ज्ञापन (एमओयू) की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय पात्र प्रस्तावों का मूल्यांकन एनएचएआई के केंद्रीकृत तंत्र के माध्यम से किया जाएगा, जिससे अनुमोदन प्रक्रिया तेज होगी।
प्राधिकरण के अनुसार स्वीकृत शोध परियोजनाओं को प्रारंभिक चरण में 2,000 किलोमीटर तक के राष्ट्रीय राजमार्गों का मानक नमूना डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। इससे संस्थान पायलट परियोजनाएं संचालित कर कार्यप्रणालियों का परीक्षण तथा शोध परिणामों की उपयोगिता प्रदर्शित कर सकेंगे।
एनएचएआई ने कहा कि डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए सभी संस्थानों को गोपनीयता समझौते (एनडीए) पर हस्ताक्षर करने होंगे। डेटा का व्यावसायिक उपयोग या किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा करने की अनुमति नहीं होगी। गोपनीयता संबंधी प्रावधान परियोजना समाप्त होने के बाद भी तीन वर्ष तक लागू रहेंगे।
प्राधिकरण के अनुसार शोध से विकसित होने वाले पेटेंट, कॉपीराइट और अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों पर एनएचएआई और संबंधित शोध संस्थान का संयुक्त स्वामित्व होगा। सफल पायलट परियोजनाओं के बाद उपयोगी तकनीकों और मॉडलों का मूल्यांकन बड़े स्तर पर किया जाएगा तथा प्रभावी पाए जाने पर उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में लागू करने पर विचार किया जाएगा।
