अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान पर किये हवाई हमले, होर्मुज में बढ़ा तनाव

वाशिंगटन/ तेहरान, 21 जुलाई (वार्ता) अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लगातार दसवीं रात बड़े पैमाने
पर हवाई हमले किये, जिनमें ईरान के सैन्य कमान केंद्रों, मिसाइल एवं ड्रोन प्रक्षेपण स्थलों, समुद्री सैन्य ढांचे और वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस बीच, ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति वाले देशों को निशाना बनाने का दावा किया है। संघर्ष तेज होने से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गयी है।

सेंटकॉम के अनुसार, लगभग पांच घंटे तक चले इस अभियान का आदेश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था। हमले सिरिक, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप, शीराज़ और इस्फहान में किये गये। सेंटकॉम ने कहा कि इन अभियानों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने की ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर करना है। सेंटकॉम ने कहा कि मई की शुरुआत से अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 90 करोड़ बैरल नहीं, बल्कि करीब 900 वाणिज्यिक जहाजों के जरिए 45 करोड़ बैरल कच्चे तेल के सुरक्षित आवागमन में सहायता की है। अमेरिकी सेना ने कहा कि वह जलडमरूमध्य से गुजरने वाले नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उधर, ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। पेंटागन के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में जॉर्डन में दो और इराक में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हुई है। सात जुलाई से संघर्ष तेज होने के बाद अब तक लगभग 100 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें से 96 प्रतिशत फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने कुवैत, बहरीन और रुकबान क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किये। आईआरजीसी ने हिमार्स मिसाइल प्रणालियों, रडार प्रतिष्ठानों, उपग्रह रिसीवरों, दूरसंचार केंद्रों और एमक्यू-9 ड्रोन हैंगरों को निशाना बनाने का भी दावा किया।

इन दावों की हालांकि स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। कुवैत की सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सोमवार को ईरान की ओर से दागे गये हथियारों को रोकने के लिए कार्रवाई की। जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, जॉर्डन की सेना ने देश की ओर बढ़ रहे पांच ईरानी ड्रोन मार गिराये, जिससे कोई जनहानि या नुकसान नहीं हुआ।संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता और बढ़ गयी है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सोमवार को यूनान के स्वामित्व वाले दो तेल टैंकर हमलों की चपेट में आ गये, जबकि यूनाइटेड किंगडम मेरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने ओमान के लीमा बंदरगाह के निकट एक अन्य टैंकर पर हमले की पुष्टि की, जिसके बाद चालक दल को जहाज छोड़ना पड़ा।

आईआरजीसी ने मंगलवार तड़के दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के तथाकथित ‘दक्षिणी मार्ग’ से गुजरने की कोशिश कर रहे दो अन्य तेल टैंकरों में विस्फोट और भीषण आग लग गयी। यमन के ईरान समर्थित हूती आंदोलन ने सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने की योजना की घोषणा की, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं और बढ़ गयी हैं। इस बीच, श्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अमेरिकी सैनिकों पर किसी भी हमले का जवाब ‘कई गुना अधिक’ दिया जाएगा।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि हमले जारी रहे तो भविष्य में ईरान के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी सांसदों के एक वर्ग ने सैन्य अभियान समाप्त करने की मांग की है। सीनेट में डेमोक्रेटिक अल्पमत नेता चक शूमर ने कहा कि युद्ध जितना लंबा चलेगा, अमेरिकी सैनिकों की जान उतनी ही अधिक खतरे में रहेगी। उन्होंने कहा कि सीनेट में डेमोक्रेट इस सैन्य अभियान को समाप्त करने और सैनिकों को वापस बुलाने के लिए फिर से मतदान कराने का प्रयास करेंगे।

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