
सिंगरौली। महापौर कार्य करने में अक्षम हैं,फाइलों को लटकाने एवं भटकाने का काम करती हैं। करीब एक साल से परिषद की बैठक नही बुलाई गई जबकि आयुक्त की तरफ से पांच बार बैठक बुलाने के लिए एजेण्डा भेजा गया। ऐसे महापौर को नैतिकता के आधार पर तत्काल पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उक्त बातें परिषद की बैठक के दूसरे दिन कांग्रेस पार्षद अखिलेश सिंह ने प्रश्रकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया। पार्षद के द्वारा मेयर का इस्तीफ मांगे जाने पर तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। हालाकि अधिकांश पार्षदों ने कांग्रेस पार्षद के बातों का समर्थन भी किया। बैठक में मुख्य रुप से निगमायुक्त सविता प्रधान,विधायक प्रतिनिधि अरविंद दुबे, कार्यपालन यंत्री संतोष पाण्डेय, उपायुक्त आरपी बैस, उपायुक्त वित्त अनुपम दुबे, सहायक यंत्री प्रवीण गोस्वामी आदि उपस्थित रहे।
नगर पालिक निगम सिंगरौली के सभागार में आज परिषद अध्यक्ष देवेश पाण्डेय की अध्यक्षता में दूसरे दिन बैठक शुरू हुई। बैठक शुरू होते ही मेयर रानी अग्रवाल पर निशाना साधा गया। मेयर से पूछा गया कि जब पिछले वर्ष 27 मार्च तथा 1 अपै्रल एवं 4 अपै्रल तथा 7 अपै्रल को परिषद की बैठक में शामिल अन्य एजेंडा सर्वसम्मति से पास हुआ था। इसके बावजूद महापौर ने उच्च न्यायालय का शरण ली। जिसके चलते सिविक सेंटर निर्माण,व्यवसायिक प्लाजा गनियारी एवं अन्य कार्य प्रभावित हैं। मेयर ने ऐसा कदम क्यों उठाया? इस पर मेयर ने जो जवाब दिया उससे पार्षद संतुष्ट नही आए। उन्होने साफ कहा कि एमआईसी के बगैर कोई भी एजेंडा शामिल नही किया जा सकता है। परिषद को अधिकार नही है। इसके बाद आयुक्त सविता प्रधान स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि दो तिहाई बहुमत है तो परिषद अन्य बिंदु को शामिल करने के लिए सक्षम है। उपायुक्त आरपी वैश्य ने भी इसी बात का हवाला दिया। इसके बावजूद मेयर रानी अग्रवाल अपनी बातों को मनाने के लिए अड़ी हुई थी। अंतत: कड़े शब्दो में कहा गया कि मेयर न्यायालय से अपना अपील वापस लें। इन्ही सब बातों को लेकर काफी नोकझोंक व आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। परिषद अध्यक्ष ने सिविक सेंटर के मामले में स्पष्ट किया कि परिषद के द्वारा सिर्फ दुकानों के निर्माण के भुगतान के लिए कहा गया था। उन्होने यह भी बताया कि सिविक सेंटर में 260 दुकानों का निर्माण होगा और इससे 25 करोड़ रुपए की आमदनी होगी। महीना का किराया अलग से है। करीब 10 से 12 करोड़ा दुकानों के निर्माण में लागत भी आएगी। इस निर्माण से नगर निगम को आय को एक बढ़िया स्त्रोत मिल जाता। जुड़वा तालाब पर महापौर को घेरते हुए अध्यक्ष ने कहा कि पिछले वर्ष 11 जनवरी को प्रदेश के नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का आगमन बैढ़न हुआ था। जहां उन्होने महाराणा प्रताप के प्रतिमा अनावरण करते हुए जुड़वा तालाब का नामकरण महाराणा प्रताप सरोवर के रुप में ऐलान किए थे। परंतु इसमें भी महापौर और एमआईसी सदस्य रोड़ा डालते हुए न्यायालय की शरण ली। उन्होने साफ शब्दों में कहा कि महापौर नगर निगम विकास के लिए गंभीर नही है। केवल विकास कार्यो में रोड़ा डालना इनका मकसद है। हालाकि मेयर रानी अग्रवाल एजेंडे में अन्य बिंदु शामिल करने को अनाधिकृत बताते हुए यही राग अलाप बार बार अलाप रही थी। बाद में आप व बसपा के पार्षद छोड़कर अन्य करीब-करीब सभी पार्षदों ने महापौर को नसीहत देते हुए कहा कि नगर विकास के लिए आगे आएं। सब मिलकर नगर के विकास की बात करें। चुनाव का समय कम बचा है फिर से जनता के बीच जाना है।
व्यवसायिक प्लाजा को लेकर मेयर की घेराबंदी
वार्ड क्रमांक 41 गनियारी व्यवसायिक प्लाजा को लेकर परिषद अध्यक्ष समेत पार्षद सीमा जायसवाल,भारतेन्दू पाण्डेय,संतोष शाह,अखिलेश सिंह,शेखर सिंह,परमेश्वर पटेल व अन्य पार्षदों ने मेयर पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज डेढ़ साल से व्यापारी दर-दर ठोकरें खा रहे हैं। उन्हें आनन-फानन में दुूकानों को खाली कराकर ताला जड़ा दिया गया। उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नही की गई। मेयर व्यवसायिक प्लाजा के मामले में भी उच्च न्यायालय से भी स्थगन ले ली। मेयर ने कहा कि सरकार के आदेश पर दुकानो को खाली कराया गया है। वहीं कार्यपालन यंत्री संतोष पाण्डेय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ऐसा कोई आदेश नही आया है। सागर की घटना के बाद भविष्य को देखते हुए ऐसा स्थानीय प्रशासन ने निर्णय लिया था। कार्यपालन यंत्री की इस जवाब के बाद मेयर चुप्पी साध ली। इसके बाद अध्यक्ष ने जमकर मेयर को सवालो के कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि न्यायालय में जाने की क्या जरुरत थी। व्यापारी कहां जाएं।
जब आयुक्त ने मेयर को दिखाया आइना
परिषद की बैठक बुलाने के मामले में मेयर ने जब सफेद झूठ बोलते हुए कहा कि मेरे यहां कोई इस तरह का पत्र या प्रस्ताव नही गया है। इसके बाद अध्यक्ष के निर्देश पर परिषद सचिव उपायुक्त ने एक-एक पत्रों को तिथि वार जानकारी देते हुए बताया कि इन-इन तारिखों में परिषद बैठक का एजेंडा मेयर के यहां भेजा गया था। इसके बावजूद मेयर नकार नही रही थी। आयुक्त ने जवाब देते हुए कहा कि मेयर खुद निर्णय नही लेती है। अधिकांश अपने घर में फाइलों को ले जाती है। जिसके चलते ऐसी स्थिति निर्मित हुई है। उन्होने यह भी कहा कि सरकार ने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया है और आत्मनिर्भर बने। दूसरों पर निर्भर न रहे। आयुक्त के इस जवाब से मेयर झल्लाहट में कहा कि फाइलों को मैं अपनी सरकारी बंगले डी-1 में ले जाती हूं। वह मेरा घर नही सरकारी बंगला है। आयुक्त भी फाइलों को अपने बंगले में ले जाती है।
दो गुटों में बंटे भाजपा के पार्षद
परिषद की बैठक में आज दूसरे दिन भी भाजपा के पार्षद दो गुटो में बंटते नजर आए। आलम यह था कि पार्षद भारतेन्दू पाण्डेय,नेता प्रतिपक्ष सीमा जायसवाल एवं संतोष शाह ददोली अलग ही राग अलाप रहे थे। बैठक में परिषद पर अपना दबाव बनाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाएं लेकिन परिषद अध्यक्ष देवेश पाण्डेय के सख्त तेवर के आगे भाजपा पार्षदों के तेवर नरम पड़ गए। यहंा बताते चले के बीते दिन कल परिषद बैठक के पहले दिन भाजपा के करीब पांच पार्षदो ने परिषद बैठक का वाकआऊट कर दिया था। जिसमें नेता प्रतिपक्ष सीमा जायसवाल,भारतेन्दू पाण्डेय,संतोष शाह व दो अन्य पार्षद शामिल थे। चर्चा है कि संगठन ने जहां अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए चाबूक चलाया। तब भाजपा के पार्षद अध्यक्ष के सुर में सुर मिलाने लगे।
जब अध्यक्ष ने पार्षद अनिल को कहा बाहर जाओ
बैठक शुरूआत में ही नगर निगम अध्यक्ष देवेश पाण्डेय ने कांग्रेस पार्षद अनिल वैश्य को साफ शब्दों में कहा कि आप बाहर जाइए। बैठक के विरोध में आप ने मोर्चा खोला है,विकास के मुद्दे पर यह बैठक बुलाई गई है। सिंगरौली नगर निगम को जो विकास प्रभावित है,उस पर चर्चा करनी है और आप उसका विरोध कर रहे हैं,इसलिए बाह चले जाइए। इतना कहने के बावजूद पार्षद बैठक में जमे रहे जबकि अध्यक्ष एक नही कई बार बाहर जाने के लिए बोला। वहीं बैठक में पार्षद अनिल को आज अहमियत नही दी गई।
परिषद में इन प्रस्तावों को मिली हरीझंडी
नगर निगम अध्यक्ष के अध्यक्षता में परिषद की विशेष बैठक आयोजित
नगर विकास के संबंध महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिसमें सर्व प्रथम परिषद की पूर्व बैठको 27 मार्च,1 अपै्रल, 4 अपै्रल,7 अप्रैल के कार्यवाही विवरण का सर्व सम्मति से अनुमोदन किया गया। एजेडा विंदु में शामिल प्रस्तावों जिनमें नपानि के निर्वाचित सदस्य एवं अधिकारियो -कर्मचारियो को मोबाईल भत्ता दिलाये जाने संबंधी प्रस्ताव को सर्व सम्मति से पारित किया गया। बैठक में देवरा एनिमल सेंटर के संचालन को गौ सेवा संस्थानो को सौंपे जाने चर्चा की गई। बैठक में वार्ड क्रमांक 40 पुराना धर्मशाला की भूमि तथा पुराने जिला चिकित्सालय बैढ़न की भूमि पर व्यावसायिक योजना बनाने एवं पीपीपी मोड संचालित करने के संबंध में निणर्य लिया गया। बैठक में नगर निगम की कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए कुशल, अर्द्धकुशल तथा अकुशल श्रमिको की सख्या बढ़ाने सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया। परिषद बैठक में नगर पालिक निगम सिंगरौली क्षेत्र में वाणिज्यिक भवन/भूमि, आवासीय भवन भूमि के करो में 10 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय सर्व सम्मति से पारित किया गया।
