
नीमच। आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों के लिए इस बार कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। आयकर विभाग ने रिटर्न फॉर्म में ऐसे नए प्रावधान जोड़े हैं, जिनका उद्देश्य वित्तीय लेनदेन में अधिक पारदर्शिता लाना और कर चोरी पर प्रभावी रोक लगाना है।
अब केवल आय ही नहीं, बल्कि कुछ विशेष प्रकार की प्राप्तियों और लेनदेन की जानकारी भी रिटर्न में देना अनिवार्य हो गया है। उक्त जानकारी देते हुए सीए भावेश सिहल ने बताया की यदि किसी करदाता को एक वित्तीय वर्ष के दौरान 50 हजार रुपये या उससे अधिक का गिफ्ट मिला है, तो उसकी जानकारी भी आयकर रिटर्न में दर्ज करनी होगी। विभाग का मानना है कि इससे बैंक खातों और घोषित आय के बीच अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।इन लेनदेन की भी देनी होगी जानकारी
नए नियमों के तहत रिश्तेदार या परिचित से प्राप्त 50 हजार रुपये या उससे अधिक के गिफ्ट का उल्लेख करना होगा। इसके अलावा संपत्ति के बंटवारे से मिली राशि, संयुक्त बैंक खाते के विभाजन से प्राप्त धन, ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि की बिक्री से मिली राशि, सरकारी अनुदान, सोलर सब्सिडी और अन्य वित्तीय सहायता जैसी प्राप्तियों की जानकारी भी रिटर्न में शामिल करनी होगी। पहले ऐसी सूचनाएं अलग माध्यमों से विभाग तक पहुंचती थीं, लेकिन अब इन्हें सीधे आईटीआर का हिस्सा बनाया गया है।
बैंक स्टेटमेंट से करें मिलान
आयकर विशेषज्ञों का सुझाव है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाता अपने पिछले वित्तीय वर्ष के बैंक स्टेटमेंट,क्रेडिट कार्ड और अन्य वित्तीय लेनदेन का सावधानीपूर्वक मिलान कर लें। यदि बैंक खातों में दर्ज लेनदेन और आयकर रिटर्न में दी गई जानकारी में अंतर पाया जाता है, तो विभाग उसकी जांच कर सकता है।
कर चोरी पर सख्ती की तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव केवल अतिरिक्त जानकारी जुटाने के लिए नहीं हैं, बल्कि हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन की प्रभावी निगरानी के लिए किए गए हैं। इससे करदाता द्वारा घोषित आय और वास्तविक बैंकिंग लेनदेन का बेहतर मिलान संभव होगा। साथ ही ऐसे मामलों की पहचान आसान होगी, जहां बड़ी रकम का लेनदेन तो हुआ, लेकिन उसे आयकर रिटर्न में शामिल नहीं किया गया। इससे कर व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनने और कर चोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
