
शाजापुर, नगर की गौरक्षा सेना हमेशा मुसीबत में फंसे गौवंश को बचाने तत्पर रहते हैं. इसका उदाहरण उस समय देखने को मिला जब चीलर नदी के दलदल में जीवन और मौत के बीच में झूल रहे एक गौवंश को नगर के गौरक्षकों ने अपनी जान की भी परवाह किए बगैर उसे बाहर निकाला.
रविवार को गौरक्षा सेना की टीम ने दो अलग-अलग स्थानों पर रेस्क्यू अभियान चलाकर एक घायल मादा हिरण और चीलर नदी में फंसे एक गोवंश की जान बचाई. दोनों अभियानों में स्थानीय लोगों ने भी सहयोग किया. पहला रेस्क्यू बरवाल क्षेत्र में सुबह करीब 8 बजे कांजा,बरवाल के बाल्डे के पास आश्रम के समीप किया गया. यहां तार फेंसिंग के बीच बनी खंती में एक मादा हिरण गंभीर रूप से घायल मिली. सूचना मिलने पर गौरक्षा सेना की बरवाल टीम के अर्जुन राजपूत, राजपाल राजपूत और कुलदीप राजपूत मौके पर पहुंचे. टीम ने हिरण को सुरक्षित निकालकर पशु चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उसका उपचार कराया गया. बाद में वन विभाग की रेस्क्यू टीम को हिरण सौंप दिया गया.
जलकुंभी में फंसे गोवंश को नदी से निकाला
दूसरा रेस्क्यू नगर की भावसार धर्मशाला के सामने चीलर नदी में किया गया. यहां जलकुंभी और गंदगी के बीच एक गोवंश फंस गया था. सूचना पर गौरक्षा सेना के संस्थापक धर्मेंद्र शर्मा और रेस्क्यू विशेषज्ञ विशाल देवतवाल टीम के साथ पहुंचे. विशाल देवतवाल कमर में रस्सी बांधकर नदी में उतरे और टीम व स्थानीय लोगों की मदद से टेंट के पाइप का सहारा लेकर गोवंश को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. दोनों सफल रेस्क्यू अभियानों के बाद स्थानीय लोगों ने गौरक्षा सेना की तत्परता और साहस की सराहना की. समय पर कार्रवाई से घायल हिरण और गोवंश दोनों की जान बचाई जा सकी.
