
सीधी। आरईएस सीधी घोटाले के दोषी को उज्जैन की कमान सौंपना काफी सुर्खियों में बना हुआ है। आरईएस सीधी में लाखों के घोटाले के दोषी तत्कालीन ईई को नियम विरुद्ध ननि उज्जैन में करोड़ों के सिंहस्थ प्रकोष्ठ का प्रभार देने की शासन से शिकायत हुई है।
शिकायत में कहा गया है कि मप्र शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आदेश क्रमांक 370, दिनांक 26 मार्च 2025 के द्वारा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग सीधी को तत्कालीन कार्यपालन यंत्री हिमांशु तिवारी के विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित की गई थी। उक्त जांच में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीधी जांच कर्ता अधिकारी थे। जांच में सभी आरोप पूर्णत: सिद्ध एवं प्रमाणित पाए गए थे। लिहाजा विभागीय जांच में 51 लाख 88 हजार 999 रुपए वसूली योग्य अपव्यय राशि प्रमाणित हुई थी। जांच में यह पाया गया था कि नवीन तालाब निर्माण सिरौला बांध में अपव्यय राशि 3 लाख 15 हजार 398 रुपए, नवीन तालाब निर्माण समदा कृषि फार्म में अपव्यय राशि 3 लाख 15 हजार 805 रुपए, जनपद पंचायत मझौली में ठोंगा दानव पर्वत पर खेल विकास कार्य का कोई उद्देश्य प्राप्त नहीं हुआ। ऐसे में 15 लाख 98 हजार 314 रुपए अपव्यय राशि वसूली योग्य पाई गई। इसी तरह बिछिया, भमरहा रोड से घूघा मार्ग में 21 नग ड्रेनेज कार्य में अपव्यय राशि 2 लाख 37 हजार 501 रुपए, कोल्हुआ मुख्य मार्ग से जमतिहवा टोला तक पुल-पुलियों के निर्माण में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। राशि वसूली योग्य पाई गई। दुबरी से चिन्नवाह मार्ग उन्नयन अंतर्गत रपटा निर्माण में पुलिया क्षतिग्रस्त पाई गई जिसमें अपव्यय राशि 40 लाख 8 हजार 97 रुपए, कुंदौर से पहाड़ी पहुंच मार्ग में रिपटा निर्माण क्षतिग्रस्त 2 लाख 45 हजार 162 रुपए वसूली योग्य, मोहनिया से पिपरोहर मार्ग में आंकलित से अधिक भुगतान 2 लाख 45 हजार 162 रुपए। जांच के दौरान बेलहा डेम बिजौर पिकअप बियर निर्माण का घटिया निर्माण कराने पर 3 लाख 66 हजार 9 सौ रुपए वसूली योग्य पाया गया। जांच के बाद अपचारी कर्मचारी हिमांशु तिवारी को सिंहस्थ प्रकोष्ठ नगर निगम उज्जैन का कार्यपालन यंत्री की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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दोष सिद्ध प्रभारी ईई की यहां हुई शिकायत
दोष सिद्ध प्रभारी ईई हिमांशु तिवारी की शिकायतकर्ता एएन सिंह सीधी द्वारा पूरे प्रमाण के साथ प्रमुख सचिव मप्र शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भोपाल, अपर मुख्य सचिव मप्र शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भोपाल, प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन नगरीय निकास एवं आवास विभाग भोपाल, आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भोपाल, मुख्य अभियंता तकनीकी कार्यालय विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल, प्रमुख अभियंता मध्य प्रदेश शासन लोक निर्माण/ग्रामीण यांत्रिकी सेवा भोपाल, आयुक्त नगर पालिक निगम उज्जैन से शिकायत की गई है।
महाकुंभ के दौरान करोड़ो श्रद्धालु आएंगे। ऐसे महत्वपूर्ण कार्य में भ्रष्ट इंजीनियरों की पोस्टिंग कहीं न कहीं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगी। यदि गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्यों से कोई दुर्घटना होती है तो इसके जिम्मेदार ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और उनकी पोस्टिंग कराने वाले लोग होंगे। समय रहते जांच में दोषी पाए गए इंजीनियर की पोस्टिंग पृथक की जानी चाहिए।
इनका कहना है
कमलेश्वर पटेल
पूर्व मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास म.प्र.शासन
