परिसीमन से बदलेगा सीधी का राजनैतिक समीकरण!

सीधी।सीधी जिले में परिसीमन होने की स्थिति में जनसंख्या के असंतुलित विस्तार और नए क्षेत्रों के जुड़ने से स्थानीय विधानसभा और लोकसभा सीटों का पूरा चुनावी गणित बदल जाएगा। इससे राजनीतिक दलों को अपने परंपरागत वोटबैंक, जातिगत समीकरणों और दिग्गज नेताओं की रणनीति में भारी फेरबदल करना होगा।सीधी जैसे क्षेत्रों में परिसीमन के राजनीतिक प्रभावों को मुख्य रूप से क्षेत्रीय समीकरणों से ही समझा जा सकता है।

मतदाता क्षेत्रों की भौगोलिक सीमा में भी होगा बदलाव

परिसीमन का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या लगभग समान हो। यदि सीधी संसदीय क्षेत्र या इसके अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों जिनमें सीधी, सिहावल, चुरहट, धौहनी, की सीमाओं का पुनर्गठन होता है, तो कई ग्रामीण और शहरी इलाके एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। इसका सीधा असर किसी नेता विशेष के प्रभाव वाले क्षेत्रों और उनके स्थानीय दबदबे पर पड़ेगा।

जातिगत और सामाजिक समीकरण पर एक नजर

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र और सीधी में आदिवासी, ब्राह्मण, पटेल (कुर्मी), क्षत्रिय, और पिछड़ा वर्ग की आबादी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाती है। यदि परिसीमन के दौरान आरक्षित सीटों ( एससी/ एसटी) का अनुपात बदलता है या सामान्य और आरक्षित क्षेत्रों की सीमाओं में फेरबदल होता है, तो राजनीतिक दलों को अपने टिकट वितरण और रणनीति में आमूल-चूल परिवर्तन करने पड़ेंगे।

नए नेतृत्व का उदय और पुराने दिग्गजों के लिए चुनौती

परिसीमन के बाद जब चुनावी क्षेत्रों का भूगोल बदलता है, तो कई नेताओं को अपने पुराने गढ़ को छोड़कर नए मतदाताओं के बीच पैठ बनानी पड़ती है। इससे सीधी जिले की राजनीति में नए युवा चेहरों या स्थानीय समीकरणों में फिट बैठने वाले नेताओं को आगे आने का मौका मिल सकता है, जबकि पुराने दिग्गजों को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से मेहनत करनी होगी।

विकासात्मक मुद्दों का बढ़ेगा प्रभाव

परिसीमन होने से जिन नए क्षेत्रों का विलय होगा, वहां की मूल समस्याएं जैसे- पानी, सड़क, रोजगार भी नई सीटों का हिस्सा बनेंगी। राजनेताओं को अपनी पारंपरिक राजनीति से हटकर नए क्षेत्रों के विकास कार्यों और स्थानीय जनभावनाओं के आधार पर चुनावी मैदान में उतरना होगा।

 

इनका कहना है-

 

सीधी जिले के परिसीमन होने की स्थिति में बहुत बड़ा परिवर्तन होगा । सीधी में ही लगभग 6 विधानसभा क्षेत्र हो सकते हैं और सीधी संसदीय क्षेत्र विभाजित होकर दो लोकसभा क्षेत्र बन जायेगा है। महिलाओं के लिए एक से दो सीट आरक्षित होने की प्रबल संभावना है। सीधी जिले की राजनीति में महिलाओं का नया प्रवेश होगा और विधानसभा क्षेत्रों में भी जनसंख्या के अनुसार एससी/ एसटी सीटें बनेंगी। परिसीमन के बाद जो लोग केवल परंपरागत वोट पर निर्भर है उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और जिन लोगों का जनाधार है वह कहीं से चुनाव लड़ सकते हैं।

 

पं.केदारनाथ शुक्ल

पूर्व विधायक एवं राजनैतिक विश्लेषक

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वास्तव में मध्यप्रदेश की आबादी के हिसाब से परिसीमन उपरांत विधानसभा की सीट 230 से बढ़कर 315-345 होने की संभावना है।उसी परिपेक्ष्य में सीधी की विधानसभा एवं लोकसभा सीटों में बढौत्री होना निश्चित है।

महिलाओं को एक तिहाई मिलने वाला आरक्षण सीधी सहित मध्यप्रदेश की राजनैतिक तस्वीर को बदलने का प्रमुख कारक होगा। परिसीमन से जनता को समान प्रतिनिधित्व के साथ स्थानीय मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों की बेहतर आवाज एवं संघर्ष का फायदा होगा।

विनय सिंह

राजनैतिक विश्लेषक एवं विचारक

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