
बैतूल। जिले में ग्रामीण विकास के लिए उपलब्ध कराई गई करोड़ों रुपये की राशि वर्षों से जिला पंचायत के खाते में बिना उपयोग के पड़ी है। स्थिति यह है कि जिला पंचायत के पास आश्रय शुल्क और अतिरिक्त आश्रय शुल्क मद में करीब 7 से 8 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं, लेकिन इनका उपयोग अब तक किसी भी विकास कार्य में नहीं किया गया। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव से लोग परेशान हैं।
जानकारी के अनुसार, पंजीयन विभाग द्वारा मकान और भूखंड की रजिस्ट्री के दौरान वसूले जाने वाले शुल्क का एक निर्धारित हिस्सा जिला पंचायत और नगरीय निकायों को दिया जाता है। वर्ष 2014 से यह राशि संबंधित संस्थाओं को उपलब्ध कराई जा रही है ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, जहां अधिकांश नगरीय निकाय हर वर्ष इस राशि का उपयोग विकास कार्यों में कर लेते हैं, वहीं जिला पंचायत ने अब तक इस मद की राशि से कोई कार्य शुरू नहीं किया है। परिणामस्वरूप यह राशि लगातार बढ़ती जा रही है और वर्तमान में लगभग आठ करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
बताया जाता है कि शासन ने इस राशि के उपयोग के उद्देश्य पहले से निर्धारित किए हैं। इसके बावजूद जिला पंचायत स्तर पर राशि के उपयोग को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि शासन से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद ही राशि खर्च की जाएगी, जबकि इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों के कई जरूरी कार्य लंबे समय से लंबित हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस राशि का उपयोग ग्रामीण कॉलोनियों को मुख्य सड़क से जोड़ने, पहुंच मार्ग बनाने तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया जा सकता है। वर्तमान में जिले के कई ग्रामीण इलाकों में ऐसी कॉलोनियां हैं, जहां मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक उपलब्ध नहीं है। बरसात के दिनों में इन क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वर्षों से जमा इस राशि का समय पर उपयोग किया जाता तो कई गांवों और कॉलोनियों में सड़क सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित हो सकती थीं। उनका मानना है कि राशि निष्क्रिय रखने के बजाय जनहित के कार्यों में खर्च की जानी चाहिए।
जिला पंचायत के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी इंद्रा महतो ने बताया कि आश्रय शुल्क और अतिरिक्त आश्रय शुल्क की राशि जिला पंचायत को प्राप्त होती है, लेकिन इसे खर्च करने के संबंध में शासन से अभी तक स्पष्ट आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। इसलिए राशि का उपयोग नहीं किया गया है।
