
जबलपुर। मप्र हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी को बिना विधिवत चार्जशीट जारी किए लंबे समय तक निलंबित नहीं रखा जा सकता है। जस्टिस विशाल धगत की एकल पीठ ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजय यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिया, साथ ही निलंबन आदेश निरस्त कर दिया। एकलपीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्वतंत्रता दी है कि यदि वे चाहें तो कानून के दायरे में रहकर याचिकाकर्ता के विरुद्ध चार्जशीट जारी कर सकते हैं।
दरअसल विवि कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय यादव को 23 जनवरी 2026 को निलंबित किया गया था और उन पर विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ शारीरिक दुव्र्यवहार का आरोप लगाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विपिन यादव और सुनील पांडे ने दलील दी कि संजय यादव को बिना किसी आरोप पत्र के 7 महीने से निलंबित रखा गया है, जो अनुचित है। हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में यह स्थापित किया है कि यद्यपि संबंधित नियमों में निलंबन की कोई अधिकतम समय सीमा निर्धारित नहीं है, किंतु निलंबन को एक दंड के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि निलंबन के बाद 90 दिनों के भीतर कर्मचारी को चार्जशीट सौंप दी जानी चाहिए। इस मामले में इतनी लंबी अवधि तक बिना चार्जशीट, कार्यवाही अधर में लटकी रही, जिसे अदालत ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध माना। हालांकि अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन को यह छूट दी है कि यदि वे चाहें तो कानून के दायरे में रहकर याचिकाकर्ता के विरुद्ध चार्जशीट जारी कर सकते हैं। उक्त मत के साथ न्यायालय ने मामले का निराकरण कर दिया।
