राष्ट्रीय मंच पर गूंजा सीधी का जल संरक्षण मॉडल, वॉटर सीरीज़ वेबिनार में साझा किए नवाचार

सीधी। ‘‘कैच द रेन’’ अभियान के माध्यम से जल संरक्षण में जनभागीदारी को सशक्त बनाने विषय पर आयोजित वॉटर सीरीज़ वेबिनार के 55वें संस्करण में मध्यप्रदेश के सीधी और महाराष्ट्र के नासिक जिले ने अपने नवाचारों एवं उत्कृष्ट कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति दी। देशभर के जल संरक्षण विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में दोनों जिलों के अनुभव साझा किए गए।

सीधी जिले की ओर से कलेक्टर विकास मिश्रा ने जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए नवाचारों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिले ने जल संवर्धन को केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तक सीमित नहीं रखा बल्कि इसे महिलाओं की आजीविका, सम्मान, जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी और व्यापक जनसहभागिता से जोडक़र एक जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक सहभागिता पर आधारित इस मॉडल ने जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बदलाव लाया है।

कलेक्टर ने बताया कि जिले में 12983 जल संरक्षण कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं जिनसे जल भंडारण क्षमता 1 करोड़ 35 लाख 73874 घनमीटर से बढक़र 1 करोड़ 80 लाख 56486 घनमीटर हो गई है। अर्थात 44 लाख 82612 घनमीटर अतिरिक्त जल संग्रहण क्षमता विकसित हुई है। इससे लगभग 896 हेक्टेयर (करीब 2,215 एकड़) अतिरिक्त भूमि सिंचित हो सकेगी तथा उपलब्ध अतिरिक्त जल से लगभग एक लाख लोगों की दैनिक पेयजल आवश्यकता की पूर्ति संभव होगी। प्रत्येक प्रणाली से 10 से 15 किसानों को सिंचाई सुविधा मिल रही है। वेबिनार में नासिक जिले ने भी कैच द रेन अभियान के अंतर्गत कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा सामुदायिक सहभागिता आधारित अपने सफल प्रयासों को साझा किया। दोनों जिलों की प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि जल संरक्षण तभी स्थायी और प्रभावी बन सकता है जब उसे स्थानीय समुदाय, जनप्रतिनिधियों और आजीविका से जोड़ा जाए।

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नदी पुनर्जीवन अभियान में कराया जा रहा चेकडैम, स्टापडैम का निर्माण

कलेक्टर ने बताया कि नदी पुनर्जीवन अभियान अंतर्गत जिले की सभी पांचों जनपद पंचायतों में एक-एक नदी का चयन कर चेकडैम, स्टॉपडैम, बोल्डर चेकडैम और गैबियन संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। इन प्रयासों से गर्मी के मौसम में भी नदियों में जल उपलब्ध रहने लगा है। सिहावल विकासखंड के व्यवहार खांड, कुनझुनकला, बहरी, अमराही एवं पोड़ी में स्थापित लिफ्ट सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से नदी का पानी ऊंचाई पर बसे आदिवासी किसानों तक पहुंचाया जा रहा है।

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फलदार पौधों से करोड़ों रूपये की वार्षिक आय का अनुमान

जल संरक्षण कार्यों को आजीविका से जोडऩे की दिशा में 211 तालाबों में मत्स्य पालन तथा 178 तालाबों में सिंघाड़ा उत्पादन कराया जा रहा है। इन गतिविधियों से इस वर्ष शासन को लगभग 34 लाख रुपये की आय हुई, जबकि मछुआ समूहों, स्व-सहायता समूहों और व्यक्तिगत मत्स्य पालकों को मिलाकर लगभग 80 लाख रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। जिले में 18,600 फलदार पौधे तैयार किए गए हैं, जिनसे भविष्य में लगभग 3.59 करोड़ रुपये की वार्षिक आय का अनुमान है।

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