
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने सागर जिले की बांदा तहसील अंतर्गत ग्राम बामना में सरकारी योजनाएं व विकास कार्य से प्रतिबंध हटाकर उन्हें लागू किये जाने संबंधी जनहित याचिका का पटाक्षेप कर दिया। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा है कि पगरा बांध निर्माण के दौरान पुनर्वास योजना लागू की गई थी, जिसके तहत पात्र लोगों को मुआवजा भी प्रदान किया गया। पुनर्वास योजना के तहत मुआवज़ा लेने के बाद, ग्रामीणों को अपनी संपत्तियों पर कब्ज़ा बनाए रखने या बांध के पास मौजूद सरकारी जमीन पर कब्जा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि बामना का पूरा गाँव पुनर्वास योजना और बांध से प्रभावित इलाके में आता है। नतीजतन जनहित में न केवल डूबने वाली जमीन बल्कि आस-पास की जमीन को भी खाली कराना ज़रूरी है। अगर गाँव में स्थायी नागरिक सुविधाएँ और विकास कार्य जारी रखे जाते हैं, तो प्रभावित ग्रामीणों को वहाँ बने रहने के लिए बढ़ावा मिलेगा, जिससे पुनर्वास योजना को लागू करने में रुकावट आएगी और इलाके को खाली कराने में बेवजह बाधाएँ पैदा होंगी। यह जनहित याचिका बामना निवासी संजय यादव व जगदीश यादव की ओर से दायर की गई थी। जिसमें कहा गया था ग्राम पंचायत बामना को कल्याण एवं विकास योजनाओं के लिए सरकारी निधि जारी नहीं की जा रही थी।
