नयी दिल्ली, 16 जुलाई (वार्ता) दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की एक टीम ने दिल्ली में हुई फायरिंग और रंगदारी की घटनाओं के सिलसिले में पश्चिम बंगाल के मालदा से गोलू गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि आरोपी की पहचान दिल्ली के रहने वाले जगदीश के रूप में हुई है। वह इस साल के प्रारंभ में राष्ट्रीय राजधानी के छावला इलाके में हुई रंगदारी और फायरिंग की दो अलग-अलग घटनाओं का सरगना था। स्पेशल सेल, साउथ वेस्टर्न रेंज के अनुसार आरोपी के खिलाफ दिल्ली के छावला थाना में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(4)/125 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25(1)(a)/27 के तहत दो प्राथमिकी दर्ज हैं। पुलिस के बयान के अनुसार 20 मार्च को दर्ज कराई गई शिकायत में पीड़ित को 12 जनवरी, 2026 को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया था, जिसमें 5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी और कॉलर ने खुद को हैरी बॉक्सर (गोलू गिरोह का सदस्य) बताया था। रंगदारी की मांग पूरी न होने पर गिरोह के तीन सदस्यों ने, जिनमें आरोपी जगदीश भी शामिल था, पीड़ित के जिम को निशाना बनाया और 19-20 मार्च की रात को तीन राउंड फायरिंग भी की। गोलू गिरोह के सदस्यों से जुड़ी रंगदारी और फायरिंग की धमकी की एक और घटना 25-26 जून की रात को हुई, जिसमें एक अन्य पीड़ित के घर पर कई राउंड फायरिंग की गई और पैसे की मांग पूरी न होने पर अगली बार जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस के अनुसार आरोपी जगदीश इस अपराध के लिए सुविधाएं मुहैया कराता था और उसने फिरौती के लिए हथियार और बाइक उपलब्ध कराए थे।
दोनों घटनाएं दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के छावला में हुई थीं, जो गिरफ्तारी वाली जगह से 2500 किलोमीटर से भी अधिक दूर है, जहां आरोपी भाग गया था। इंस्पेक्टर संदीप यादव और नीरज कुमार के नेतृत्व में स्पेशल सेल ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया। आखिरकार 28 जून को यूनिट को पश्चिम बंगाल के मालदा में जगदीश के छिपे होने की जानकारी मिली। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एक रेडिंग टीम तुरंत पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुई और पुष्टि की कि वह मालदा, पश्चिम बंगाल के कमला बारी में दो किलोमीटर चौड़े आम के बाग में छिपा हुआ था। टीम ने मालदा इलाके में एक सप्ताह की तलाशी के बाद आरोपी को कमला बारी में रेल गेट के पास पकड़ा। आरोपी को गिरफ्तारी के बाद स्थानीय अदालत में पेश किया गया और आगे की पूछताछ के लिए ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली वापस लाया गया। इससे पहले 7 जून 2026 को इसी टीम ने लंबी मशक्कत के बाद उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से उसके करीबी साथी विकास को गिरफ्तार किया था। जांच से पता चला कि विकास ने जगदीश के साथ मिलकर दोनों आपराधिक घटनाओं के लिए मुख्य मददगार और सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले के तौर पर काम किया था।

