नयी दिल्ली, 16 जुलाई (वार्ता) दिल्ली पुलिस की ओर से बच्चों की सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे एक महीने के जागरूकता अभियान के तहत 15 जुलाई तक 1.32 लाख से अधिक छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, एक से 15 जुलाई के बीच 1,32,757 छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्राओं को अपनी सुरक्षा के बुनियादी तरीके सिखाना और आपात स्थिति में आत्मविश्वास के साथ प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना है। दिल्ली पुलिस द्वारा एक जुलाई से एक महीने के लिए चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान में राजधानी के स्कूलों में डिजिटल कॉमिक पुस्तिकाओं के जरिए कक्षा में चर्चा भी कराई जा रही है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार तैयार की गई कॉमिक पुस्तिकाओं के माध्यम से सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी देना है। कक्षा में होने वाली चर्चाओं के दौरान छात्र-छात्राएं कॉमिक में दिए गए विषयों पर अपने विचार रखते हैं, बाल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को समझते हैं, शिक्षकों और सहपाठियों के साथ चर्चा करते हैं और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी करते हैं।
अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन फीडबैक व्यवस्था भी शुरू की है। इसके तहत शिक्षक हर चर्चा के बाद छात्रों की सीख और अपने अनुभव साझा कर सकेंगे। इससे अभियान की प्रभावशीलता का आकलन करने और भविष्य में इसे और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इस अभियान के तहत हर सप्ताह स्कूलों को नई डिजिटल कॉमिक पुस्तिकाएं भेजी जा रही हैं। पुलिस ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे सप्ताहांत में अपने बच्चों के साथ कॉमिक में दिए गए सुरक्षा विषयों पर चर्चा करें, ताकि अगले सप्ताह स्कूल में होने वाली कक्षा चर्चा से पहले बच्चे इन विषयों को अच्छी तरह समझ सकें। हर सप्ताह जारी होने वाली कॉमिक पुस्तिका में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक अलग विषय शामिल होता है। इनमें साइबर सुरक्षा, शारीरिक छेड़छाड़ से बचाव, नशे के प्रति जागरूकता और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) कानून जैसे विषय शामिल हैं। इसी के साथ, दिल्ली पुलिस की महिला एवं बाल सुरक्षा विशेष इकाई और जिला पुलिस की टीमें राजधानी के स्कूलों में आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर भी चला रही हैं।

