नप दफ्तर के सामने पार्षदों का धरना

सिंगरौली। नगर परिषद बरगवां में कथित भ्रष्टाचार, आउटसोर्स कर्मचारियों की मनमानी और सामग्री खरीदी में अनियमितताओं को लेकर बुधवार को नगर परिषद कार्यालय के सामने पार्षदों ने धरना देकर मोर्चा खोल दिया।

पार्षदों ने तीन अलग-अलग ज्ञापन सौंपते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। पूरे घटनाक्रम को लेकर दिनभर नगर परिषद परिसर में गहमागहमी बनी रही और मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। पहले ज्ञापन में पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद के आउटसोर्स कर्मचारी जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। धरने में मुख्य रूप से उपाध्यक्ष रीतू अग्रवाल, पार्षद उर्मिला देवी बसोर, मानिकचन्द्र गुप्ता, श्यामकली बैस, अर्चना, अनारकली, प्रियंका साकेत समेत अन्य पार्षद बैठे रहे।

पार्षदों ने सामग्री खरीदी पर उठाए सवाल

दूसरे ज्ञापन में नगर परिषद बरगवां में वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 के दौरान हुई सामग्री खरीदी पर सवाल उठाए गए। पार्षदों का आरोप है कि खरीदी गई सामग्री न तो पूरी मात्रा में उपलब्ध कराई जा रही है और न ही उसकी गुणवत्ता संतोषजनक है। उन्होंने मांग की कि पार्षदों की एक समिति गठित कर स्टोर पंजी के साथ सभी खरीदी गई सामग्रियों का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता उजागर हो सके। पार्षदों के इस ज्ञापन के बाद नगर परिषद में हड़कंप मचा है। वहीं पार्षदों ने यहां तक कहा है कि खरीदी के संबंध में लगातार शिकायते प्राप्त हो रही हैं और सामग्री पूर्ण मात्रा में सप्लाई नही की गई। जानकारी लेने पर टालमटोल एवं गोलमाल जवाब दिया जाता है। इस पूरे मामले में अध्यक्ष सीएमओ को निशाने पर लिया है।

आउटसोर्स कर्मी ने मांगा 5 हजार नजराना

ज्ञापन के अनुसार वार्ड क्रमांक-6 के निवासी शिवेंद्र प्रताप सिंह ने सेफ्टी टैंक की सफाई कराने के लिए आउटसोर्स कर्मचारी सिद्धार्थ महतेले से संपर्क किया तो कथित रूप से 5 हजार की मांग की गई और राशि को गोपनीय रखने की बात कही गई। जब इसकी जानकारी वार्ड पार्षद तक पहुंची तो कर्मचारी ने कथित रूप से यह कह दिया कि अब संबंधित व्यक्ति का काम नहीं होगा। पार्षदों ने इस पूरे मामले का ऑडियो साक्ष्य होने का दावा करते हुए संबंधित कर्मचारी को सेवा से पृथक करने की मांग की। वहीं धरने के दौरान पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद में पारदर्शिता का अभाव है और जनप्रतिनिधियों की बातों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। नगर परिषद कार्यालय के सामने पार्षदों की एकजुटता ने पूरे प्रशासनिक अमले का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। धरने के दौरान नगर परिषद में काफी हलचल रही।

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