जीडीपी देश के आर्थिक स्वास्थ्य को मापने का सबसे अहम तरीका है। भारत में NSO हर तिमाही इसके आंकड़े जारी करता है, जो रोजगार, आय और निवेश की स्थिति को समझने में मदद करते हैं।
सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी (GDP) किसी भी देश की आर्थिक प्रगति और उसकी वित्तीय स्थिति को मापने का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। सरल शब्दों में कहें तो एक निश्चित समय के भीतर देश की सीमाओं में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को ही जीडीपी कहते हैं। यह न केवल अर्थव्यवस्था के आकार को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि देश विकास की राह पर है या मंदी की ओर बढ़ रहा है। जीडीपी के आंकड़ों के आधार पर ही सरकारें अपनी भविष्य की आर्थिक नीतियां और बजट तैयार करती हैं, जिससे आम नागरिक के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
वास्तविक और सांकेतिक जीडीपी
जीडीपी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है, जिनमें पहली सांकेतिक (Nominal) जीडीपी है जो वर्तमान बाजार की कीमतों पर आधारित होती है। दूसरी वास्तविक (Real) जीडीपी है जिसमें महंगाई के प्रभाव को समायोजित कर उत्पादन का सटीक मूल्य निकाला जाता है। वास्तविक जीडीपी ही किसी देश के असली आर्थिक उत्पादन की सही तस्वीर पेश करती है क्योंकि इसमें कीमतों का उतार-चढ़ाव शामिल नहीं होता।
