कांग्रेस कबीलों के सरदारों से अलग अलग मिलने आ रहे हैं अजय

शाजापुर, चिंता इस बात की नहीं कि कबीले का क्या होगा, फिक्र तो इसकी है कि सरदार कौन होगा… गुटों और कबीलों में बटी कांग्रेस की गुटबाजी का अनुपम उदाहरण एक बार फिर पूर्व मंत्री अजय सिंह के दौरे पर देखने को मिल गया है. कांग्रेस के कबीलों के अलग-अलग सरदारों के घर जाकर वे मुलाकात करेंगे और इस मुलाकात को कांग्रेसी कांग्रेस को मजबूत करना बता रहे हैं. अब अलग-अलग कांग्रेस के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कांग्रेस को कैसे मजबूत करेगी, ये तो कांग्रेसी ही बता सकते हैं. शाजापुर जिले में कराड़ा कांग्रेस, सिकरवार कांग्रेस, जोशी कांग्रेस अब एक नई कांग्रेस का इसमें नाम जुड़ गया है गोहिल कांग्रेस. इसके अलावा अजय सिंह के दौरे से एक और नई कांग्रेस का नाम चर्चा में है वाजपेयी कांग्रेस. हालांकि विनीत वापपेयी वो कांग्रेसी है, जो शुजालपुर में भाजपा की जीत की दुआ कर रहे थे और शाजापुर में भी वे समय-समय पर कराड़ा हराओ समिति के संयोजक रहे हैं, लेकिन इन दिनों वे अजय सिंह के स्वागत के लिए फ्लैक्स में विनीत वाजपेयी मित्र मंडल के नाम से स्वागत करने के लिए आतुर हैं.

गौरतलब है कि गुटबाजी और कबीलों में बटी कांग्रेस पहले ही अलग-थलग है. अब पूर्व मंत्री अजय सिंह के शाजापुर दौरे ने कबीलों में बटी कांग्रेस को सडक़ पर ला दिया है. जिस तरीके से फ्लैक्स लगाए हैं, उसमें अपने-अपने समर्थकों के फोटो लगे हुए हैं. कराड़ा कांग्रेस का कार्यक्रम मल्हार गार्डन में है. गोहिल कांग्रेस का कार्यक्रम राधा गार्डन में है और सिकरवार कांग्रेस का कार्यक्रम उनके निवास पर है. इस बीच खबर यह भी है जिन्होंने समय-समय पर कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालकर कांग्रेस को हराने का काम किया. जो कभी भाजपा को जिताने की कसमें खाते थे, कभी कांग्रेसी बन जाते थे, ऐसे एक महानुभव के घर भी अजय सिंह मेल मुलाकात करेंगे. कांग्रेस का नेता आए और मुस्लिम नेताओं के घर न जाए, ऐसा हो नहीं सकता. इसी क्रम में अजय सिंह वकील एहसानउल्ला काजी के घर भी जाएंगे. अब देखना यह है कि धर्म निरपेक्षता की बात करने वाली कांग्रेस के अजय सिंह का दौरा एहसानउल्ला काजी के घर तक ही सीमित रहता है या फिर शहर के किसी सनातनी धर्म गुरु के घर भी पहुंचता है.

 

 

पहले साथ थे, अब दावेदार हैं…

 

पूर्व मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता वीरेंद्र सिंह गोहिल की दो दशकों से अधिक रही. लेकिन 2018 में वीरेंद्र सिंह गोहिल ने हुकुमसिंह कराड़ा का चुनाव में साथ दिया और हुकुमसिंह कराड़ा ने भी उन्हें जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष पद की कुर्सी से नवाजा, लेकिन अब दोनों के बीच फिर एक बार अनबन तो नहीं पहले जैसा मन नहीं है. 2028 के चुनाव में सहकारिता नेता वीरेंद्र सिंह गोहिल भी शाजापुर विधानसभा से कांग्रेस के दावेदार बताए जा रहे हैं. खास बात यह है कि दोनों ही नेताओं के राजनीतिक आका दिग्विजय सिंह हैं. अब दिग्विजय सिंह 2028 में गोहिल को रिफिल करते हैं या कराड़ा का पलड़ा भारी करते हैं.

 

ये कैसी धर्म निरपेक्षता…

 

एक तरफ कांग्रेस के नेता अपने आप को धर्म निरपेक्ष बताते हैं, लेकिन पूर्व मंत्री अजय सिंह का शाजापुर आगमन पर कांग्रेस नेताओं के अलावा वे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एहसानउल्ला काजी के भी घर जाएंगे. यदि अजय सिंह किसी सनातनी धर्म गुरु के घर जाते हैं, तो वे सही मायने में धर्म निरपेक्ष नेता कहलाएंगे. यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर कांग्रेस का अपना वोट बैंक अल्पसंख्यक तुष्टिकरण ही माना जाएगा.

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