ट्रंप ने ईरान के पुलों एवं बिजली संयंत्रों पर हमले की धमकी दी

वाशिंगटन, 15 जुलाई (वार्ता) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान वार्ता की मेज पर लौटने से इनकार करता है, तो अमेरिका अगले सप्ताह की शुरुआत में ही ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बना सकता है। दोनों देशों के बीच लगातार चौथे दिन हुए हमलों के बाद तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका ने फिर से ईरान की नौसैनिक घेराबंदी भी शुरू कर दी है।
श्री ट्रंप ने मंगलवार रात फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में चेतावनी दी कि अगर ईरान बातचीत शुरू नहीं करता है, तो अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर देगा। उन्होंने कहा, ” अगला हफ्ता उनके लिए बहुत बुरा होने वाला है। अगर वे मेज पर आकर बातचीत नहीं करते हैं, तो हम उनके सभी बिजली संयंत्रों और पुलों को तबाह कर देंगे।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान में अमेरिकी थल सेना भेजने की संभावना से भी इनकार नहीं किया, हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि वह अन्य विकल्पों को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा, “कभी-कभी आपको ज़मीनी अभियान की ज़रूरत होती है, लेकिन हमारे पास अन्य लोग हैं जो हमारे लिए ज़मीनी अभियान चलाएंगे।” श्री ट्रंप की यह टिप्पणी उनके उस विवादित प्रस्ताव को वापस लेने के कुछ ही घंटों बाद आई है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव की जगह खाड़ी देशों के साथ ‘बड़े’ व्यापार और निवेश समझौते किए जाएंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “बेहतर होगा कि आप समझौता कर लें, वरना आपके पास कुछ नहीं बचेगा।” उन्होंने कहा कि कूटनीति विफल होने पर ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जाएगा। सीएनएन के अनुसार, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि आपस में संपर्क में हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जब तक ईरान होर्मुज से समुद्री यातायात को बाधित करना बंद नहीं करता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। सैन्य अभियान की अवधि के बारे में पूछे जाने पर श्री ट्रंप ने कहा कि ये हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक वह खुद इसे रोकने का फैसला नहीं करते। इस बीच, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर सात घंटे तक ताबड़तोड़ हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि इस अभियान के तहत ‘दर्जनों’ सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए ताकि वाणिज्यिक जहाजों और चालक दल के सदस्यों को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कम किया जा सके।

दूसरी ओर, ईरान ने कहा कि दक्षिण-पूर्वी शहर बामपुर के पास एक सैन्य अड्डे पर हुए हमलों में उसके कम से कम सात सैन्यकर्मी मारे गए हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान ने इसके जवाब में जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे। कुवैत और बहरीन ने बाद में कहा कि उन्होंने इन हवाई हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेंटकॉम ने ईरान पर जानबूझकर वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया और कहा कि सात व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में ‘चालक दल के लगभग दस से अधिक सदस्य मारे गए, लापता या घायल हुए हैं।’ नये सिरे से शुरू हुई लड़ाई ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज में यातायात को बाधित कर दिया है, जिससे जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गयी हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत में, श्री ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य का ‘रक्षक’ है। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रस्तावित पारगमन शुल्क को वापस ले लिया गया है, लेकिन ईरानी जहाजों को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। ईरान ने हालांकि फिर दोहराया कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर उसी का नियंत्रण है। उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका गलतफहमी में है अगर उसे लगता है कि सैन्य दबाव और आर्थिक नाकेबंदी ईरान को बातचीत की मेज पर लौटने के लिए मजबूर कर देगी। श्री ट्रंप की ताजा धमकियों ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने चेतावनी दी थी कि नागरिकों या नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आएगा।

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