नयी दिल्ली, 14 जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने दिव्यांग व्यक्तियों के बारे में असंवेदनशील टिप्पणियों से जुड़े मामले में स्टैंड-अप कॉमेडियन एवं यूट्यूबर समय रैना और चार अन्य पर अपने पूर्व निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए मंगलवार को तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने माना कि न्यायालय के जारी निर्देशों का सही भावना से पालन नहीं किया गया।
पीठ ने टिप्पणी की कि कॉमेडियनों को अपने कार्यक्रमों में दिव्यांग व्यक्तियों को आमंत्रित करने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, उन्हें आमंत्रित करने या शामिल करने का कोई सार्थक प्रयास नहीं किया गया।
रैना की ओर से हलफनामा दाखिल किये जाने की दलील पर भी पीठ ने गंभीर चिंता जतायी। न्यायालय ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई हलफनामा मौजूद नहीं है। न्यायालय को गुमराह किया गया था।
न्यायालय ने कहा कि केवल धन जुटाना उसके निर्देशों के अनुपालन का विकल्प नहीं हो सकता। इन निर्देशों का उद्देश्य दिव्यांगों को दान या प्रचार की वस्तु मानने के बजाय उनके समावेश, गरिमा और सार्थक भागीदारी को बढ़ावा देना था।
न्यायालय ने कहा कि प्रतिवादियों का व्यवहार दिव्यांग समुदाय की गरिमा और संवेदनाओं के प्रति उदासीनता दर्शाता है।
पीठ ने रैना से कहा, “यदि आप अपने तौर-तरीके सुधारना या समाज के सदस्यों की भावनाओं का सम्मान करना नहीं जानते हैं, तो आपको परिणामों का सामना करना पड़ेगा।”
पीठ ने चेतावनी दी कि पूर्व में जारी निर्देशों का लगातार उल्लंघन करने पर और अधिक कठोर परिणाम भुगतने होंगे।
न्यायालय ने हालांकि शुरू में काफी अधिक जुर्माना लगाने पर विचार किया था, लेकिन अंततः उसने इस राशि को तीन-तीन लाख रुपये तक सीमित रखा। न्यायालय ने इस राशि को दो सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया और दोहराया कि न्यायालय के पूर्व निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए।