नगर परिषद में सियासी भूचाल: सत्तारुढ़ दल के पार्षद ने पेश किया इस्तीफा

डिंडौरी। नगर परिषद डिंडौरी की राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब वार्ड क्रमांक 15 की निर्वाचित पार्षद सरस्वती हरिहर पाराशर ने अपने पद से त्यागपत्र अध्यक्ष नगर परिषद डिंडौरी के हाथों में पेश कर दिया। जिसमें उन्होंने वार्ड की लगातार उपेक्षा, विकास कार्यों के अभाव और जनता की मूलभूत समस्याओं के निराकरण में निकाय की विफलता को प्रमुख कारण बताया है। पार्षद सरस्वती हरिहर पाराशर ने त्यागपत्र में उल्लेख किया है कि उन्होंने समय-समय पर वार्ड की समस्याओं और आवश्यक विकास कार्यों को लेकर संबंधित अधिकारियों, मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं परिषद की बैठकों में कई बार लिखित और मौखिक रूप से मांग रखी, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होने से वे स्वयं को अपने दायित्वों के निर्वहन में असमर्थ महसूस कर रही हैं।त्यागपत्र में उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि “जब मैं अपनी ही जनता की समस्याओं का समाधान नहीं करा पा रही हूँ, तो इस पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।” इसी नैतिक आधार पर उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपते हुए उसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया है।

अध्यक्ष ने नहीं दिया कोई जवाब — इस संबंध में जब नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता सारस से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गईं। अध्यक्ष की इस चुप्पी ने मामले को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

भाजपा के गढ़ में बड़ी नाराजगी — गौरतलब है कि नगर परिषद डिंडौरी में कुल 15 वार्ड हैं। इनमें वार्ड क्रमांक 2 को छोड़कर शेष सभी वार्डों में भाजपा समर्थित पार्षद निर्वाचित हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ दल के एक पार्षद द्वारा वार्ड की उपेक्षा और विकास कार्यों के अभाव का हवाला देते हुए इस्तीफा सौंपना राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे निकाय के भीतर बढ़ते असंतोष के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

नगरवासियों का कहना है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद मूलभूत सुविधाओं के लिए आज भी लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है।

बढ़ सकती है निकाय की मुश्किलें — वार्ड 15 की पार्षद का इस्तीफा केवल एक जनप्रतिनिधि का व्यक्तिगत निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे नगर परिषद की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों पर उठे गंभीर सवालों के रूप में देखा जा रहा है। यदि त्यागपत्र स्वीकार होता है तो यह नगर परिषद की कार्यशैली पर विपक्ष के साथ-साथ आम नागरिकों को भी सरकार और निकाय प्रशासन से जवाब मांगने का अवसर देगा।

फिलहाल निगाहें अध्यक्ष नगर परिषद और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्षद द्वारा उठाए गए मुद्दों पर निकाय कोई ठोस पहल करता है या नहीं।

इनका कहना है —

यह विडंबना ही है कि भाजपा के शासनकाल में उनकी ही पार्टी के पार्षद असंतुष्ट है , तो आप अंदाजा सहज ही लगा सकते है कि हमारी क्या स्थिति होगी ? भाजपा की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है, जिसकी झलक आप भाजपा के ही पार्षद द्वारा पेश किए गए इस्तीफे के रूप में देख सकते है।

ज्योतिरादित्य भलावी (कांग्रेस पार्षद वार्ड क्रमांक – 2,डिंडोरी

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