
जबलपुर। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई मंगलवार को नहीं हो सकी। प्रशासनिक कारणों से सूचीबद्ध हुए प्रकरणों पर अब 15 जुलाई से प्रतिदिन दोपहर 2.30 बजे हाईकोर्ट की विशेष पीठ नियमित रूप से सुनवाई करेगी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने आदेश जारी कर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डे-टू-डे सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायाधीश विनय सराफ की विशेष पीठ के समक्ष ओबीसी आरक्षण से संबंधित 91 याचिकाएं सूचीबद्ध थीं। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने न्यायालय को बताया कि मामले सोमवार की सूची में क्रमांक-16 पर लगे हैं, जबकि दोपहर 2.30 बजे से संबंधित बैच उपलब्ध नहीं रहेगा। इस पर न्यायालय को अवगत कराया गया कि इन प्रकरणों की सुनवाई मूल रूप से 15 जुलाई से निर्धारित थी तथा लगातार सुनवाई के आदेश पहले से प्रभावी हैं। प्रशासनिक कारणों से ये मामले त्रुटिवश 14 जुलाई की सूची में शामिल हो गए थे। न्यायालय ने इसके बाद स्पष्ट किया कि सभी 91 याचिकाओं पर सुनवाई अब 15 जुलाई से प्रतिदिन दोपहर 2.30 बजे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी।
सुकों से वापस हुईं हैं याचिकाएं-
उल्लेखनीय है कि ये सभी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट से वापस हाईकोर्ट भेजी गई हैं। मामला वर्ष 2019 में राज्य सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के निर्णय से जुड़ा है। इस निर्णय को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कई भर्ती प्रक्रियाओं में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लाभ पर अंतरिम रोक लगा रखी है। इसके चलते प्रदेश की अनेक शासकीय भर्तियां और चयन प्रक्रियाएं वर्षों से प्रभावित हैं।
सात सालों से टिकी है निगाहें-
करीब सात वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित इस विवाद की सुनवाई पर प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों, कर्मचारी संगठनों और राज्य शासन की निगाहें टिकी हैं। आगामी सुनवाई में विशेष पीठ आगे की सुनवाई की रूपरेखा, अंतरिम आदेशों और संबंधित कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी। उल्लेखनीय है कि ओबीसी आरक्षण तथा पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े मामलों की सुनवाई में न्यायमूर्ति विनय सराफ कामन जज के रूप में भी शामिल रहेंगे।
