भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा परिसर में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि UCC पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई को अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस को भी इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख बताना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि UCC हो या भोजशाला का मुद्दा, कांग्रेस हर विषय को हिंदू-मुस्लिम और वोट बैंक की राजनीति के नजरिए से देखती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि समिति की रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की गई है। पहले खंड में 10 अध्यायों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू कानूनों एवं परंपराओं का विश्लेषण करते हुए अनुशंसाएं दी गई हैं। दूसरे खंड में प्रस्तावित UCC विधेयक का प्रारूप शामिल है, जिसमें 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां हैं। तीसरे खंड में जन-परामर्श का विस्तृत विवरण दिया गया है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और वेबसाइट के माध्यम से सुझाव आमंत्रित किए थे, जिनमें 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है।
समिति ने अपनी सिफारिशों में अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने का सुझाव भी दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुस्लिम, हिंदू और ईसाई समाज सहित सभी वर्गों ने UCC पर अपने विचार रखे हैं, लेकिन कांग्रेस ने राजनीतिक दल के रूप में अब तक अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया। उन्होंने इसे कांग्रेस का दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि प्रदेश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते उसे इस मुद्दे पर जनता के सामने अपना स्पष्ट रुख रखना चाहिए।
