भोपाल। नगर निगम में वर्षों से पदोन्नति की बाट जोह रहे कर्मचारियों की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिरता दिखाई दे रहा है. निगम के अधिकारियों ने सीआर को लेकर उनके पदोन्नति वाली प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है. वहीं 12 जुलाई तक पदोन्नति कर सरकार को हाईकोर्ट में 13 जुलाई को अपना जवाब प्रस्तुत करना था. आदेश में सख्त निर्देश थे कि सभी विभागों को निर्धारित समय में पदान्नति कर दी जाना चाहिए. जो कि नगर निगम में अभी तक नहीं की जा सकी है. निगम मुख्यालय में विगत तीन दिनों से पदान्नति को लेकर देर रात तक बैठकें की जा रही है. निगम आयुक्त ने पदोन्नति की पात्रता रखने वाले कर्मचारियों को अपनी सीआर देने के लिए कहा है. वह भी जब से विभाग में पदस्थ हैं. उसमें दो अधिकारियों से सीआर करवाने के लिए निर्देशित किया है. जिन कर्मचारियों ने एक अधिकारी से सीआर को तैयार कर निगम में पदोन्नति के लिए जमा किये थे, उनको वह सभी सीआर के दस्तावेज वापस कर दिए गए हैं. उनको मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि आप दूसरे अधिकारी से भी हस्ताक्षर करवा कर लाईये वह भी जो उस समय पदस्थ रहे थे. इस तरह से अब निगम के 638 कर्मचारियों की पदोन्नति फिलहाल खटाई में पड़ गई है.
कर्मचारियों के लिए सीआर बनी पदान्नति में बाधा
प्राप्त जानकारी अनुसार कर्मचारियों और अधिकारियों की सीआर उनके वरिष्ठ अधिकारी ही लिखते हैं. वह भी एक ही अधिकारी होता है. लेकिन निगम ने अपना अलग ही रवैया अपनाया है कि अधिकतर कर्मचारियों ने वर्तमान में वरिष्ठ अधिकारी से सीआर तैयार करवा दी है. अब सभी को दूसरे अधिकारी वह भी इतने वर्षों में जो भी अधिकारी रहा हो उसी से लिखी चाहिए. कर्मचारियों के लिए विकट परिस्थिति निर्मित हो गई कि दूसरा अधिकारी या तो सेवानिवृत हो चुके हैं या फिर उनका स्थानांतरण हो चुका है कुछ को तो किसी को पता ही नहीं है कि वह वर्तमान में कहां है. एैसी स्थिति में अब कर्मचारी इतनी जल्दी कैसे ढ़ंढेंगे और वह अगर कहीं पदस्थ है तो वह सीआर पर हस्ताक्षर करेगा या नहंीं.
नहीं हुई डीपीसी
निगम में वैसे तो कोई भी कार्य समय पर नहीं होता है, लेकिन जब कर्मचारियों के हितों की बात हो तब भी अधिकारी उनका सहयोग नहीं कर रहे है. नगर निगम में पदोन्नति के लिए पूर्व से अधिकारियों की समिति बनी हुई है. उसके बाद भी अभी तक डीपीसी नहीं की गई. सिर्फ चर्चाएं हो रही हैं बैठकों का दौर चल रहा है. जो यह दर्शाता है कि निगम के अधिकारी कर्मचारियों की पदान्निति को लेकर कितने गंभीर हैं.
निगम में सभी रिकार्ड
नगर निगम के कर्मचारियों का पूरा रिकार्ड निगम के पास ही मौजूद है. और कर्मचारियों की शिकायतें या अन्य दण्ड जो निगम ने या न्यायालय ने या नगरीय प्रशासन ने लगाया हो तो वह भी उनकी सर्विस बुक में दर्ज होगा. उसी आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. और अगर कोई शिकायत या अन्य जांच प्रक्रिया में है तो उसे भी जल्द पूरा कर पदोन्नति की बाधा को दूर किया जा सकता है. लेकिन एैसा नहीं किया जा रहा है.
निगम चाहे तो रिकार्ड केआधार पर दे सकती हेै पदौन्नति
अब जब सीआर को लेकर कर्मचारियों की पदोन्नति में अड़चन आ रही है ता अधिकारी चाहे तो विभाग में मौजूद कर्मचारी के सर्विस रिकार्ड के आधार पर पदोन्नति दे सकती है. रही बात सीआर की तो वह प्रक्रिया बाद में भी पूरी की जा सकती है. जिससे कर्मचारियों को लाभ मिल जाएगा. और वर्तमान में विभाग भी अपने कार्य की जवाबदारी से मुक्त हो जाएगा.
सीआर क्यों है जरुरी
सीआर और एपीएआर का उपयोग किया जाता है, जो कि विभागों अलग अलग लागू है. नगर निगम में सीआर ही उपयोग है जिसका मतलब गोपनीय प्रतिवेदन होता है, सीआर को तैयार करते समय अधिकारी पांच बिंदुओं को देखता है, जिसमें कर्मचारी के वार्षिक कार्य प्रदर्शन का मूल्यांकन, कार्य कुशलता और व्यवहार, कार्य के प्रति ईमानदारी, विभागीय अनुशासन, वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणियाँ जो किन्हीं शिकायतों या विभाग में गलतियों को लेकर की जाती है. इस मामले में नगर निगम आयुक्त से फोन पर बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनके द्वारा फोन को अटेंड नहीं किया गया.
इनका कहना है
निगम प्रशासन को सीआर सत्यापन के लिए एक अधिकृत अधिकारी नियुक्त करना चाहिए. वर्षों पुराने अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं है, कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं या स्थानांतरण हो चुका है. कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, गोपनीय चरित्रावली, विभागीय कार्रवाई और अन्य अभिलेख नगर निगम के पास हैं. यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध कोई जांच या दंड लंबित है तो उसका उल्लेख रिकॉर्ड में उपलब्ध रहता है. ऐसे में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.
अशोक वर्मा, उपाध्यक्ष, मध्य प्रदेश अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन
