सतना : नगर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा में पदस्थ शाखा प्रभारी सहित कुछ कर्मचारियों की स्वेच्छाचारिता भ्रष्टाचारी रवैऐ के चलते न सिर्फ बेवजह की मांगे सामने रखते हुए न सिर्फ काम में रोड़ अटकाया जा रहा है बल्कि धौंस देते हुए अवैध वसूली भी की जा रही है. इंजीनियर और आर्किटेक्ट द्वारा निगमायुक्त से शिकायत करते हुए भवन अनुज्ञा प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के साथ ही जांच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई.
निगमायुक्त से की गई शिकायत में इंजीनियर और आकिटेक्ट द्वारा भवन अनुज्ञा शाखा प्रभारी राम हर्ष मिश्रा को सबसे पहले निशाने पर लिया. बताया गया कि शाखा प्रभारी का मूल पद ड्राफ्ट्समैन का है. जिन्हें भवन अनुज्ञा प्रभारी बनाना नियमों की अनेदखी है. इतना ही नहीं बल्कि शाखा प्रभारी द्वारा नियमों और प्िरकयायों की अनदेखी करते हुए आवेदकों को मानसिक रुप से प्रताडि़त किया जाता है. निजी स्वार्थों की पूर्ति के चलते शहर में नियमों के विपरीत भवन निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है. शाखा में पदस्थ अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा अनावश्यक दस्तावेजों की मांग करते हुए आवेदन को लंबित रखा जाता है.
जिससे उनके स्वहित की पूर्ति हो सके. भूिम उपयोग प्रमाण पत्र के नाम पर फाइलें वापस कर दी जाती हैं. जबकि शहर का भूमि उपयोग सह खसरा विकास योजना में पूर्व से ही तय एवं प्रकाशित है. संपत्ति कर की रसीद के नाम पर फाइलें वापस कर दी जाती हैं. तय दरों के विपरीत मनमाने तरीके से विकास शुल्क की वसूली की जाती है. इतना ही नहीं बल्कि स्थल निरीक्षण के नाम पर संबंधित उपयंत्रियों द्वारा भूस्वामी और कंसलटेंट से संपर्क किए बिना ही फाइलें वापस कर दी जाती हैं. प्लॉट वेरीफिकेशन के नाम पर जानबूझकर फाइलों को 10 दिनों तक रोका जाता है.
पारदर्शी प्रक्रिया की मांग
इंजीनियर और आर्किटेक्ट द्वारा निगमायुक्त से मांग की गई कि ननि ममें पारदर्शी एवं सुशासनयुक्त भवन अनुज्ञा को तेजी से संचालित करने के लिए उपयंत्री द्वारा स्थल अनुमोदन एवं विकास शुल्क दर अधिरोपित करने के बाद आवेदन सीधे भवन अनुज्ञा अधिकारी के पास स्वीकृति के लिए जाना चाहिए, जैसी व्यवस्था संभागीय मुख्यालय रीवा नगर निगम में प्रचलन में है. अनावश्यक परेशानियों से बचने के लिए कॉलोनी प्लॉट अप्रूवल के पहले करेक्शन अथवा मॉडिफिकेशन का विकल्प एबीपीएएस 1 एवं एबीपीएएस 2 की तरह देना सुनिश्चत किया जाए. ननि द्वारा तय दरों के अनुसार ही विकास शुक्ल लिया जाए. अधिकारियों को समय सीमा के भीतर कार्य करने के लिए जवाबदेह बनाया जाए. सुशासन के लिए सिटिजन चार्टर का पालन सुनिश्चत करने के साथ ही इसकी नियमित समीक्षा करना भी सुनिश्चत किया जाए
